आवारा कुत्तों की नसबंदी पर 5 साल में सरकार ने खर्च किये 17 करोड़ रुपये

आवारा कुत्तों की नसबंदी पर 5 साल में सरकार ने खर्च किये 17 करोड़ रुपये
भोपाल, मध्य प्रदेश की सड़कों पर आवारा कुत्तों की आबादी और आतंक बढ़ता जा रहा है.ये मामला विधानसभा तक पहुंच गया.कुत्तों की आबादी कंट्रोल करने के लिए सरकार ने विधानसभा में जो जवाब दिया उसे सुनकर सदस्य मुस्कुराए बिना नहीं रह पाए.सरकार का कहना है कुत्तों की नसबंदी पर वो 5 साल में 17 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है.

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जागत गांव डाट काम

दरअसल यशपाल सिंह सिसौदिया ने प्रदेश के पांच बड़े शहर भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी किए जाने को लेकर प्रश्न किया था। उन्होने पूछा था कि 2015 से लेकर अब तक कितने कुत्तों को पकड़ा गया, कितने कुत्तों की नसबंदी हुई और इसके लिए शासन द्वारा कितना भुगतान किया गया। इसके जवाब में पता चला कि इन पांचों शहरों में लगभग ढाई लाख कुत्तों की नसबंदी की गई है, जिसके लिए उन्हें 17 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है। वहीं इंदौर में करीब 362 कुत्तों की नसबंदी फेल भी हुई है, जिसमें उनकी मौत हुई और उन्हें दफनाया गया। इस काम के दो एनजीओ हैदराबाद के हैं, एक देवास का और एक रीवा का एनजीओ काम कर रहा है।

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने जवाब दिया

पांच शहरों में ढाई लाख कुत्तों की नसबंदी के लिए कुल 17 करोड़ की राशि खर्च की गई है। ये जवाब नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने जवाब दिया है। लेकिन अब सवाल ये है कि एनजीओ ने ये सारा काम कब किया, कुत्तों को पकड़ने के लिए क्या किसी टीम का गठन किया गया। एनजीओ की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एनजीओ ने जिन कुत्तों की नसबंदी दर्शाई है, उसके लिये क्या प्रणाली अपनाई गई।

5 शहर 17 करोड़

विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 5 बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग की नसबंदी पर ये ₹17 करोड़ की राशि खर्च की गयी. इसमें सबसे ज्यादा 7 करोड़ रुपये इंदौर में खर्च किये गए. जबकि भोपाल में छह करोड़ 76 लाख रुपए खर्च किए गए.बावजूद इसके शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या और लोगों पर हमले की संख्या भी बढ़ रही है.

4 NGO करा रहे हैं नसबंदी

बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा नसबंदी की जिम्मेदारी चार एनजीओ को दी गई है.जो सवालों के घेरे में है. सिसौदिया के मुताबिक इनमें से दो एनजीओ हैदराबाद और दो एनजीओ भोपाल के हैं.लेकिन इसके बाद भी नसबंदी का अभियान कहीं चलता नजर नहीं आता है.ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने पर सवाल उठ रहे हैं. इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.