नव वर्ष के पहले दिन सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 में उमड़ा जनसैलाब, एसएचजी दीदियों ने की रिकॉर्ड बिक्री

नव वर्ष के पहले दिन सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 में उमड़ा जनसैलाब, एसएचजी दीदियों ने की रिकॉर्ड बिक्री

जयपुर। नव वर्ष के पहले दिन गुरुवार को सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 में उत्साह, उमंग और उल्लास देखते ही बनता था। साल की पहली सुबह से ही मेला आगंतुकों से गुलज़ार रहा और हर ओर रौनक का माहौल दिखाई दिया। रंग-बिरंगे स्टॉल्स, हस्तशिल्प की खुशबू, पारंपरिक संगीत और लोगों की चहल-पहल ने मेले को एक जीवंत उत्सव में बदल दिया।

भरतपुर के जय शिव शंकर एसएचजी ने अब तक सबसे ज्यादा बिक्री की है। एसएचजी दीदी नीलम ने बताया कि ग्राहक उनके जूट प्रोडक्टस को बहुत पसंद कर रहे हैं। बाड़मेर का दिनुवानी एसएचजी बिक्री के मामले में दूसरे स्थान पर रहा और इनके कशीदाकारी के उत्पाद सभी को लुभा रहे हैँ। बाड़मेर का ही जोगमाया एसएचजी भी रिकॉर्ड बिक्री कर रहा हैं, उनके बनाए अजरक प्रिंट कपड़े बेहद लोकप्रिय हो रहे हैँ। समूह सदस्य गंगादेवी ने इसके लिए राजीविका के इस मंच का आभार जताया।  

फ़ूड स्टाल्स में जयपुर के राधास्वामी एसएचजी ने सबसे ज्यादा सेल की है, उनकी पाव भाजी लोगों को बहुत पसंद आ रही है। सवाई माधोपुर का सरस्वती एसएचजी के व्यंजनों का स्वाद भी लोगों को बहुत लुभा रहा है और बिक्री में ये दूसरे स्थान पर हैं।

इन समूहों से जुड़ी महिलाओं के चेहरों पर सजी मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि यह मेला उनके लिए केवल एक बाजार नहीं बल्कि सपनों को साकार करने का मंच है। एसएचजी दीदियों ने बताया कि उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को ग्राहकों से भरपूर सराहना मिल रही है। कई स्टॉल्स पर तो ग्राहक दोबारा लौटकर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उनके उत्पादों को न केवल बेहतर बिक्री मिल रही है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिल रही है। एक एसएचजी दीदी ने भावुक होकर बताया कि राजीविका के सहयोग से आज वह आत्मनिर्भर बन पाई हैं। सरस मेले ने उन्हें आजीविका का एक सशक्त माध्यम दिया है, जिसने उनकी कला को मंच प्रदान किया और उनके आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मेले में भाग ले रहीं आंध्र प्रदेश से आई एक एसएचजी दीदी ने बताया कि वह पहली बार इतने बड़े राष्ट्रीय मंच पर अपने हाथ से बने उत्पाद लेकर आई हैं। उन्होंने कहा कि “यहाँ लोगों की सराहना और भरोसा देखकर आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है। पहले हम अपने गांव तक ही सीमित थे, लेकिन अब हमारे उत्पाद पूरे देश तक पहुँच रहे हैं।”

वहीं हरियाणा से आई एक अन्य एसएचजी सदस्य ने बताया कि उनके हैंडलूम उत्पादों की मांग इतनी अधिक है कि कई बार स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि “सरस मेला हमारे लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर भी है।

राजस्थान की एक एसएचजी दीदी, जो पारंपरिक परिधान लेकर आई हैं, ने बताया कि कई ग्राहकों ने उनके काम की बारीकी और डिज़ाइन की जमकर तारीफ की। कुछ ग्राहकों ने तो भविष्य में सीधे ऑर्डर देने की भी बात की, जिससे उन्हें लंबे समय तक आजीविका का भरोसा मिला है।


मेले में पहुंचे ग्राहक भी कम उत्साहित नहीं दिखे और उनके अनुभव भी उतने ही सकारात्मक रहे। जयपुर की गृहिणी कविता ने बताया कि उन्हें यहां एक ही जगह देश के अलग-अलग राज्यों के उत्पाद देखने और खरीदने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि यहां की चीज़ों में अपनापन और मेहनत साफ झलकती है, इसलिए शॉपिंग करते हुए अच्छा लगता है।

अजमेर से आए कॉलेज छात्र राहुल ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ मेले में आया और यहां की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उन्हें खासा प्रभावित किया। “लाइव परफॉर्मेंस और अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्य देखकर ऐसा लगा जैसे पूरा भारत एक मंच पर उतर आया हो”।

वहीं जयपुर घूमने आई एक विदेशी पर्यटक सारा ने बताया कि उन्हें भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्र बेहद आकर्षक लगे। उन्होंने कहा, “यह मेला भारत की विविधता को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है और यहां की हस्तनिर्मित वस्तुएं यादगार हैं।”

जयपुर की आयुषी अपने दोस्तों के साथ मेले में पहुंचीं और बताया कि यहां यंगस्टर्स के लिए भी बहुत कुछ खास है। उन्हें विशेष रूप से स्टाइलिश बैग्स, पर्स, विंटर वियर और सिल्क के स्टोल्स बेहद पसंद आए। वहीं जयपुर के ही नरेश अपने परिवार के साथ मेला देखने आए। उन्होंने बताया कि फूड कोर्ट और लाइव क्लासेज उनके बच्चों को इतनी पसंद आईं कि वे तीसरी बार मेला देखने आए हैं।

कई आगंतुकों ने बताया कि सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रम इतने आकर्षक हैं कि उन्हें देखने के लिए वे बार-बार मेले में आ रहे हैं। देसी ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटक और अन्य शहरों से जयपुर घूमने आए सैलानी भी मेले का भरपूर आनंद लेते नजर आए। दिल्ली से आए युवा अंकित ने बताया कि वे अपनी फैमिली के साथ मेला देखने आए हैं और उन्हें यहां के टेक्सटाइल से सजे स्टॉल्स बेहद पसंद आए। उन्होंने जमकर खरीदारी की और कहा कि इस तरह के आयोजन भविष्य में लगातार होते रहने चाहिए, क्योंकि इससे एक ही स्थान पर पूरे भारत की संस्कृति, कला और स्वाद का अनुभव मिलता है।

इन सभी अनुभवों से स्पष्ट है कि सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और भारत की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच बनकर उभरा है।