राजीविका दिवाली मेले में उमड़ा विजिटर्स का हुजूम, राजस्थानी व्यंजनों ने मेले की रौनक में लगाए चार चांद
आकर्षक नाइट लाइटिंग, पारंपरिक वेशभूषा में सजे बहरूपियों और राजस्थानी व्यंजनों ने बढ़ाई मेले की रौनक
जयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) की ओर से जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (IGPRS) परिसर में आयोजित राजीविका दिवाली मेला-2026 का उत्साह लगातार परवान चढ़ रहा है। आठ दिवसीय मेले के चौथे दिन बड़ी संख्या में आगंतुकों का हुजूम उमड़ा। 100 से अधिक स्टॉल्स पर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों एवं महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, हैंडलूम, सजावटी सामग्री और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को देखने एवं खरीदने के लिए विजिटर्स में खासा उत्साह देखने को मिला। दिवाली नजदीक आने के साथ ही घरों की सजावट से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी में भी तेजी आई है। पारंपरिक राजस्थानी जायकों, आकर्षक रोशनी और राजस्थानी म्यूजिक से मेले को एक खास उत्सवी माहौल मिल रहा है।
राजीविका दिवाली मेला-2026 का आयोजन 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक किया जा रहा है। मेले में आमजन के लिए प्रवेश निःशुल्क है। 100 से अधिक स्टॉल्स के माध्यम से ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों एवं महिला उद्यमियों के उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।
दिवाली की सजावट और हस्तनिर्मित पर्स-जूतियों की बढ़ी मांग
मेले में दिवाली के अवसर पर घरों को सजाने के लिए रंग-बिरंगे दीये, कैंडल, रंगोली, तोरण, आकर्षक लाइटिंग और अन्य सजावटी एवं गृह सज्जा उत्पाद आगंतुकों की पहली पसंद बने हुए हैं। पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम, कारपेट, कपड़े के खिलौने, हैंडमेड पाउच व पर्स, हर्बल प्रोडक्ट के साथ सजावटी एवं घरेलू उत्पादों की भी अच्छी मांग देखने को मिल रही है। ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित जूतियां भी विजिटर्स को खूब पसंद आ रही हैं। कोटा डोरिया की साड़ियां, जयपुर की प्रसिद्ध ब्लू पॉटरी, पारंपरिक कशीदाकारी, डोरमैट, कारपेट और अन्य स्थानीय उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
रंग-बिरंगी रोशनी और बहरूपियों ने बांधा समां
मेले में दिन के साथ-साथ शाम और रात का नजारा भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परिसर में की गई आकर्षक लाइटिंग और रंग-बिरंगी रोशनी से सजा मेला स्थल आगंतुकों को उत्सवी माहौल का अनुभव करा रहा है। वहीं, पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजे बहरूपिये अपनी अनूठी प्रस्तुतियों और अंदाज से लोगों का मन मोह रहे हैं। विजिटर्स खरीदारी के साथ सेल्फी पॉइंट और प्रोडक्ट लाइव मेकिंग में हिस्सा लेकर मेले में यादगार पल बिता रहे हैं। मेले में विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी से भी आयोजन का आकर्षण बढ़ा है।
राजस्थानी जायकों से महक रहा मेला परिसर
मेले में खरीदारी के साथ खानपान का भी विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। विभिन्न फूड स्टॉल्स पर दाल-बाटी-चूरमा सहित पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों और स्थानीय पकवानों का स्वाद लेने के लिए आगंतुक उत्साहपूर्वक पहुंच रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए अचार, पापड़, मसाले एवं अन्य पारंपरिक खाद्य उत्पाद भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। इस तरह मेला पारंपरिक स्वाद, स्थानीय उत्पादों और राजस्थानी संस्कृति का खूबसूरत संगम बन रहा है।
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