यूपी में आठ साल में 21.12 लाख चकबंदी वादों का निस्तारण, 531 न्यायालय हुए कंप्यूटरीकृत

यूपी में आठ साल में 21.12 लाख चकबंदी वादों का निस्तारण, 531 न्यायालय हुए कंप्यूटरीकृत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों के दौरान चकबंदी व्यवस्था के तहत लाखों वादों का निस्तारण किया गया है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2025 के बीच कुल 21 लाख 12 हजार 784 वादों का निस्तारण हुआ। इस दौरान चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं, व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने के लिए प्रदेश में 531 चकबंदी न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण किया गया है।

प्रदेश सरकार की ओर से चकबंदी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने और किसानों की भूमि से जुड़े मामलों के निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य भूमि अभिलेखों को व्यवस्थित करने और संबंधित तहसीलों तक रिकॉर्ड पहुंचाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

3,192 गांवों में पूरी हुई चकबंदी

चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी हुई थी। वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 हो गई। इन गांवों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि संबंधी अभिलेख संबंधित तहसीलों को वापस किए गए। इससे राजस्व रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और भूमि से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

21.12 लाख से अधिक वादों का निस्तारण

चकबंदी न्यायालयों में वादों के निस्तारण के मामले में भी आंकड़े जारी किए गए हैं। निदेशालय के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में कुल 21,12,784 वादों का निस्तारण किया गया। भूमि संबंधी विवादों के समाधान और चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में न्यायालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

531 न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण

चकबंदी व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण किया गया। वर्ष 2017 में इस श्रेणी में कंप्यूटरीकरण की स्थिति शून्य थी, जबकि वर्ष 2025 तक 531 न्यायालयों को कंप्यूटरीकृत किया गया।

इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारी के न्यायालयों के साथ 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय भी शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य न्यायालयों के कामकाज को व्यवस्थित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ना है।

नवप्रसार के तहत 1,302 गांव शामिल

चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में नवप्रसार के तहत कुल 1,302 गांवों को चकबंदी प्रक्रिया में शामिल किया गया। वर्ष 2017 में इस श्रेणी में 2,468 गांव दर्ज थे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 1,302 रही। विभागीय आंकड़ों में यह संख्या संबंधित अवधि के दौरान चकबंदी क्रियाओं में शामिल गांवों को दर्शाती है।