राजस्थान में प्राकृतिक एवं योगिक खेती को मिलेगी नई पहचान, कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता

राजस्थान में प्राकृतिक एवं योगिक खेती को मिलेगी नई पहचान, कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच ऐतिहासिक समझौता

किसानों को मिलेगा प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए राजयोग, तनाव प्रबंधन और क्षमता संवर्धन कार्यक्रम होंगे आयोजित

आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल

जयपुर। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की मंशा के अनुरूप राजस्थान में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के विस्तार की दिशा में कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रविवार को आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट के दौरान राजस्थान सरकार के कृषि विभाग एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान की राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग के मध्य महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान सरकार की ओर से कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। वहीं, ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग की अध्यक्ष बीके सरला के प्रतिनिधित्व में यह समझौता संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक पहल से प्रदेश में प्राकृतिक एवं योगिक खेती के विस्तार, किसानों के प्रशिक्षण, कृषि कार्मिकों के क्षमता संवर्धन तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिलेगी। समझौते के माध्यम से कृषि विभाग की तकनीकी विशेषज्ञता और ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता संबंधी अनुभवों का समन्वय किया जाएगा।

प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता : कृषि आयुक्त

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल एवं किसान हितैषी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन तथा किसानों की दीर्घकालीन आर्थिक समृद्धि से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। गोयल ने कहा कि प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं सफल कृषि मॉडल से जोड़ना आवश्यक है। कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के संयुक्त प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना पूर्व में ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्राकृतिक खेती मॉडल का अवलोकन कर इसकी सराहना कर चुके हैं।

प्रदेशभर में किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण, गांव-गांव पहुंचेगी प्राकृतिक खेती की तकनीक

समझौते के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों के लिए प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती से संबंधित प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां तथा जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, स्थानीय संसाधनों से कृषि आदान तैयार करने, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों तथा टिकाऊ कृषि प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही किसानों को सफल प्राकृतिक खेती मॉडल का प्रत्यक्ष अवलोकन कराने के लिए शैक्षणिक भ्रमण एवं अनुभव साझा करने के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान इन पद्धतियों को अपनी खेती में अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।

कृषि कार्मिकों के क्षमता संवर्धन पर विशेष जोर, तैयार होंगे मुख्य प्रशिक्षक

इस समझौते का लाभ किसानों के साथ-साथ कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, कृषि पर्यवेक्षकों एवं क्षेत्रीय कार्मिकों को भी मिलेगा। दोनों संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में कृषि कार्मिकों को प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों, प्रभावी कृषि प्रसार गतिविधियों एवं किसानों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करने के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मुख्य प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे, जो आगे जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर किसानों तथा कृषि कार्मिकों को प्रशिक्षण प्रदान कर सकेंगे।

तपोवन बनेगा योगिक प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र

समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति है। आवश्यक शासकीय स्वीकृतियों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं के अधीन प्रस्तावित यह केंद्र प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन, अनुसंधान, ज्ञान-विनिमय एवं क्षमता संवर्धन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकेगा। यहां किसानों, कृषि अधिकारियों एवं मुख्य प्रशिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्राकृतिक खेती के मॉडल प्रदर्शन तथा शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। केंद्र के संस्थागत स्वरूप, आधारभूत सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था एवं संचालन संबंधी विषयों पर पृथक से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त की जाएंगी।

कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक कार्य संस्कृति पर भी ध्यान

एमओयू के अंतर्गत कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, कार्यक्षमता एवं सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। ब्रह्माकुमारी संस्थान के सहयोग से राजयोग, ध्यान, सकारात्मक चिंतन, भावनात्मक संतुलन, कार्य-जीवन संतुलन, नेतृत्व क्षमता एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इनका उद्देश्य कृषि कार्मिकों में एकाग्रता, मानसिक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा कार्यकुशलता को प्रोत्साहित करना है।

गांव तक चलेगा संयुक्त जागरूकता अभियान

समझौते के तहत राज्य, संभाग, जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए संयुक्त जागरूकता अभियान संचालित किए जा सकेंगे। दोनों संस्थाएं किसान मेलों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों एवं प्रदर्शनियों के आयोजन में सहयोग करेंगी। प्रारंभिक चरण में चयनित जिलों अथवा कृषि समूहों में गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी। प्राप्त अनुभवों एवं परिणामों के आधार पर इनका चरणबद्ध विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में किया जाएगा।

तीन वर्ष का होगा समझौता, संयुक्त कार्ययोजना से होगी प्रगति की समीक्षा

यह समझौता प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे तथा वार्षिक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रशिक्षित किसानों एवं कृषि कार्मिकों की संख्या, आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जिलावार गतिविधियों तथा प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रगति की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। समझौते के अंतर्गत किसी भी वित्तीय दायित्व का निर्धारण पृथक स्वीकृति एवं प्रचलित शासकीय नियमों के अनुसार किया जाएगा।

किसान की समृद्धि, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में बड़ा कदम

कृषि आयुक्त गोयल ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच यह सहयोग प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों में जागरूकता एवं विश्वास बढ़ाने के साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, जल संरक्षण, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था को प्रोत्साहित करेगा।
गोयल ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राजस्थान का किसान आर्थिक रूप से समृद्ध बने, हमारी मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण मिले। प्राकृतिक एवं योगिक खेती का विस्तार इस संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
यह समझौता राजस्थान में प्राकृतिक खेती के विस्तार के साथ किसान कल्याण, कृषि कार्मिकों के समग्र विकास एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अवसर पर जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के वी सी वीरेन्द्र सिंह जैतावत एवं कृषि विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे