विकास दुबे केस : ईडी को मिली जय बाजपेयी की करोड़ों को बेनामी संपत्तियां

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 कानपुर 
एनकाउंटर में मारे गए कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खजांची जय बाजपेयी के आर्थिक साम्राज्य की तलाश कर रही ईडी और आयकर विभाग की बेनामी विंग के हाथ बड़ी सफलता लगी है। उसकी 3 बेनामी संपत्तियों को जांच एजेंसी ने दायरे में लिया है। यह प्रॉपर्टी पॉश इलाकों आर्य नगर, स्वरूप नगर और हर्ष नगर में हैं।

शुरुआती जांच में इनकी अनुमानित कीमत 4 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा 3 और संपत्तियों को बेनामी के रूप में जांच विंग ने शामिल किया है लेकिन यह कौन सी प्रॉपर्टी है, इसका खुलासा नहीं किया। इसके अलावा जांच एजेंसियों ने जय के डेढ़ करोड़ रुपए महीने के कैश लेन-देन का खुलासा किया है। शहर के डेढ़ दर्जन व्यापारियों के साथ 90 लाख की बीसी का खेल अलग से पकड़ा है।

प्रवर्तन निदेशालय के पास केस आने के बाद ब्रह्ननगर के कारोबारी के खिलाफ जांच में तेजी आई है। ईडी की एक टीम पांच दिन से शहर में है और जय से जुड़े हर सूत्र की बारीकी से पड़ताल कर रही है। इसी कड़ी में अधिकारियों ने जय और उसके भाइयों की घोषित संपत्तियों की पैमाइश की है। निर्माण में हुए खर्च का ब्योरा तैयार किया है।

जय बाजपेयी के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और विजया बैंक के खातों का पांच साल का डाटा ईडी निकलवाया गया है। इसमें जय के दो डमी खाते सामने आए हैं। ये संदिग्ध खाते हैं, जिनके जरिए एक-एक महीने में डेढ़ करोड़ का लेन-देन किया गया। ये रकम इन खातों में जमा हुई और निकाली गई। बड़े लेन-देन की गतिविधियां अगस्त 2018 से मई 2020 तक ज्यादा हुईं। जांच एजेंसी के अधिकारी के मुताबिक इस बात का संदेह है कि इन खातों का संबंध विकास दुबे के साथ हो सकता है। क्योंकि खातों से विकास दुबे के कुछ करीबी लोगों के नाम चेक काटे गए हैं।

काले कारोबार के कई राज मिले
कच्ची रसीदें और कागज से जय के काले कारोबार के कई राज एजेंसी को मिले हैं। इन्हीं में से एक है हर महीने खिलाई जाने वाली बीसी। जय के धंधे में 18 व्यापारियों ने पैसा बीसी के रूप में लगा रखा था। जय कम से कम तीन बीसी खिलाता था, जिसके जरिए 90 लाख रुपए की रकम सभी के बीच घूमती थी।