एक दर्जन गांवों में सामूहिक निर्णय, नहीं करेंगे आदिवासी शादियों में शराब का उपयोग

एक दर्जन गांवों में सामूहिक निर्णय, नहीं करेंगे आदिवासी शादियों में शराब का उपयोग

भोपाल
प्रदेश के निवाड़ी जिले के एक दर्जन गांवों के बाद अब झाबुआ जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में शराबबंदी को लेकर बड़ा सामूहिक निर्णय लिया है। झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के 12 गांवों में यह निर्णय लिया गया है कि कोई भी आदिवासी परिवार अपने यहां होने वाली शादी में शराब और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग नहीं करेगा। ऐसा करने वालों पर 50 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

कुछ आदिवासी अपने यहां की शादी में  में आने वाले मेहमानों को दिए जाने वाले भोज के साथ शराब भी परोसते थे। मालवा-निमाड़ के कुछ जिलों के साथ मध्य प्रदेश की सीमा से सटे गुजरात के इलाकों में यह कुप्रथा प्रचलित है।

आदिवासी बहुल क्षेत्र पेटलावद के 12 गांवों में बीते दिनों सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाने के लिए रखी गई ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर शादी में डीजे, शराब आदि पर पाबंदी लगा दी गई है। कोदली गांव के तड़वी (ग्राम प्रधान) काना मेड़ा ने बताया कि शादी समारोह, अन्य कार्यक्रमों में ध्वनि विस्तारक यंत्र (डीजे) बजाने के दौरान हालात बिगड़ते हुए देखे गए हैं। इससे सबक लेते हुए ग्रामसभा आयोजित कर सभी से विचार-विमर्श कर पाबंदी लगाने सहमति बन गई।

कुरीतियों को दूर करने के लिए पिछले दिनों पेटलावद की कृषि उपज मंडी में ग्राम प्रमुखों (तड़वी-पटेल) की बैठक जनजाति विकास मंच ने रखी थी। सभी ने अपनी तरफ से इन कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के लिए विचार रखे। इसके बाद ग्रामों में ग्रामसभा का आयोजन कर इन कुरीतियों पर रोक लगाने की पैरवी सभी ने की थी और अब इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

मोईवागेली के तड़वी सकरिया निनामा ने बताया कि यह फैसला इसलिए किया गया क्योंकि गांव में कुछ लोग सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीते हैं और गलियों में घूमते रहते हैं। कई बार शादियों में आदिवासी परिवार को शराब परोसने के लिए कर्ज लेना पड़ता था।