विधानसभा पहुंचा निलंबन से बहाल अफसर की प्रेस कांफ्रेंस का मामला, कार्यवाही शुरू

विधानसभा पहुंचा निलंबन से बहाल अफसर की प्रेस कांफ्रेंस का मामला, कार्यवाही शुरू

भोपाल
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री आरके श्रीवास्तव के द्वारा किए गए करप्शन के बाद उनके निलंबन और बहाली के बाद बगैर अनुमति की गई प्रेस कांफ्रेंस का मामला विधानसभा पहुंच गया है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने बताया कि बगैर अनुमति की गई प्रेस कांफ्रेंस के मामले में मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी से जांच कराकर कार्यवाही की जाएगी।

मंत्री सिसोदिया ने यह जानकारी विधायक रामलाल मालवीय के सवाल के लिखित जवाब में दी है। मालवीय ने पूछा था कि उज्जैन में चिंतामन गणेश मंदिर परिसर में डेस्टिनेशन मैरिज के लिए कराए जा रहे विकास कार्य में पीजीकंस्ट्रक्शन इन्दौर के ठेकेदार द्वारा कार्यपालन यंत्री आरईएस आरके श्रीवास्तव के  भ्रष्टाचार को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई थी? क्या कलेक्टर उज्जैन द्वारा जांच उपरांत इन्हें निलंबित किया गया था? क्या श्रीवास्तव द्वारा बहाल होते ही 1 फरवरी 2021 को प्रेसवार्ता कर अपनी सफाई दी और ठेकेदार पर काम नहीं करने के आरोप लगाए हैं? शासकीय अधिकारी किस नियम और निर्देश से इस प्रकार की प्रेसवार्ता कर सकते हैं? इसके जवाब में मंत्री सिसोदिया ने कहा कि आयुक्त उज्जैन संभाग उज्जैन द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उज्जैन एवं अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा मण्डल कार्यालय उज्जैन से प्राप्त प्रस्ताव पर आरके श्रीवास्तव कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग उज्जैन को निलंबित किया गया था।

आयुक्त उज्जैन द्वारा बाद में श्रीवास्तव के विरुद्ध विभागीय जांच तय करते हुए निलंबन से बहाल किया गया।  मंत्री के अनुसार मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 में प्रेसवार्ता से संबंधित कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है। प्रेसवार्ता के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी से जांच कराकर गुणदोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।