गांधीवादी आर्थिक मॉडल के आधार पर गांव को विकसित किया जाए

भोपाल
मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में आज "समग्र ग्राम विकास एवं ग्राम प्रबन्धन"  विषय पर शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस शोध संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ आर के पालीवाल पूर्व प्रिंसीपल चीफ कमिश्नर (आयकर )थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि किस तरह से गांधीवादी आर्थिक मॉडल के आधार पर गांव को विकसित किया जाए। गांव में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर गांव में ही समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सकती है। शोध संगोष्ठी के अध्ययक्ष एवं मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जयंत सोनवलकर ने अपने उदबोधन में बताया कि शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर गांव को उन्नत बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि  कई गांव सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्तरीय गांव में परिवर्तित हुए है। परन्तु उनकी संख्या कम है। अन्य गांव उनका अनुसरण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण,बाजार से सम्पर्क  व जनजागरूकता की महती आवश्यकता है। मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए ग्रामों में सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं जनजागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थायें और गांव वाले मिलकर सरकारी योजनाओं के सहयोग से गांवों को उन्नत बना सकते हैं।  डॉ एल एस सोलंकी कुलसचिव मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय ने कहा कि गांवों के प्रतिभावान व्यक्ति जो गांव से बाहर नगर में अच्छे पदों पर रह रहे हैं वो अपने अपने गांव से जुड़कर गांवो के विकास में सहभागी बन सकते हैं । अंत मे उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया। उक्त कार्यक्रम विश्विद्यालय में स्थापित गांधी शोध पीठ व राजा भोज शोध पीठ द्वारा आयोजित किया गया था।कार्यक्रम के समन्वयक डॉ राजीव वर्मा ने विषय का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ टी आर दहायत द्वारा किया गया।