विद्यार्थी परिषद ने आईयूएमएस प्रणाली के विरोध में दिया राज्यपाल के नाम ज्ञापन

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khemraj morya
शिवपुरी। आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई शिवपुरी द्वारा एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली (आईयूएमएस) को निरस्त करने के संबंध में जिलाधीश को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक मयंक राठौर बताया कि मध्यप्रदेश में सभी 21 शासकीय विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को डिजिटल मोड़, ऑटोमेशन में लाने के उद्देश्य से एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के 24 लाख विद्यार्थियों का अकादमी डाटा, विश्व विद्यालय के समस्त कर्मचारी और प्राध्यापकों का रिकॉर्ड एक ही प्लेटफार्म पर एकत्रित होगा। साथ ही विश्वविद्यालय की दिन प्रतिदिन की गतिविधियां परीक्षा नियंत्रक सिस्टम और अकाउंट भी इसके दायरे में आ जाएंगे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह मानना है कि विश्वविद्यालय की गतिविधियों का डिजिटल मोड में लाना और ऑटोमेशन किया जाना एक स्वागत योग्य कदम है लेकिन जिस तरीके से आईयूएमएस क्रियान्वित किया जा रहा है तथा विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित सभी गतिविधियों को नियंत्रण करने का उद्देश्य से सभी तरह की सूचनाओं को एक ही प्लेटफार्म पर केंद्रित किया जा रहा है इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, इस प्रणाली के कारण कई विसंगतियां पैदा होंगी और विश्वविद्यालय की व्यवस्था प्रभावित होगी। सर्वाधिक महत्वपूर्ण है कि यह प्रणाली शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत है। जिसमें अभाविप के नगर मंत्री विवेक धाकड़ ने बताया की सभी विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को केंद्रित करना, सूचनाओं को एक ही जगह एकत्रित करना अव्यवहारिक और अनावश्यक कदम है। इसमें डाटा हैकिंग से संबंधित कई बड़े खतरे हैं एवं मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के सभी विश्वविद्यालय अकादमी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दृष्टिकोण से स्वायत्त इकाई है। आईयूएमएस को संचालित करने वाले विश्वविद्यालय के हाथ में सभी विश्व विद्यालय की व्यवस्था देना अनुकूल नहीं है यह विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को लेकर भी कुठार घात हैं और यदि सभी विश्वविद्यालय का नियंत्रण एक ही विश्वविद्यालय के पास होगा तो एकाधिकार की भी समस्या रहेगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह मानना है कि सभी विश्वविद्यालय की प्रक्रियाओं में एकरूपता ला पाना संभव नहीं है। व्यावहारिक रूप से सभी विश्वविद्यालयों की अपनी एक अलग विशेषता और आवश्यकता है और आईयूएमएस बिना किसी मंथन और विमर्श के लागू किया जा रहा है जो कि छात्र हित में उचित नहीं है कोई भी व्यवस्था केंद्रीकृत नहीं होनी चाहिए आईयूएमएस लागू करने के पूर्व विश्वविद्यालय के समस्त हितधारकों जिसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारी प्राध्यापक अधिकारी और छात्र शामिल है उनसे कोई चर्चा नहीं की गई और ना ही अंकित सो जा लिए गए यह प्रजातांत्रिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है। अभाविप ने आगे बताया कि प्रदेश के अधिकांश शासकीय विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संबंधित गतिविधियां पहले से ही एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पेपरलेस मोड में संचालित की जा रही है, आईयूएमएस के माध्यम से उन्हें संचालित किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। सभी विश्वविद्यालय की वेबसाइट विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संचालित की जा रही है और विद्यार्थियों से संबंधित सभी जानकारियां वेबसाइट पर दी जा रही है। ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों की जानकारियों को एक ही प्लेटफार्म पर ले जाना और अव्यवहारिक है और अधिक जटिलता पैदा करेगा। कुछ विश्वविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था आज भी पुराने तरीके से संचालित की जा रही है उनमें कुछ सुधार यदि संभव है तो किया जाना चाहिए लेकिन परीक्षा प्रणाली को ऑटोमेशन पर ले जाना परीक्षा की गोपनीयता के दृष्टिकोण से उचित कदम नहीं है।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बताया कि एक तरफ पूरे देश में व्यवस्थाओं को विकेंद्रित करने और अधिक स्वायत्तता करने को लेकर कदम उठाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में इंटरनेट की उपलब्धि का एक समान नहीं है। प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी उच्च शिक्षा में पढ़ रहे आई एम एस के माध्यम से विद्यार्थी कैसे जुड़ेंगे, यह एक बड़ा प्रश्न है? कई विश्वविद्यालयों के पास आज भी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को लेकर पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है ऐसे में यह व्यवस्था किस तरीके से संचालित होगी। आईयूएमएस को लागू करने के पूर्व विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने कार्य परिषद से अनुमति प्राप्त किए बिना एमओयू के लिए सहमति दी क्या ऐसा यह कर सकते हैं?विश्वविद्यालय व्यवस्था में कार्य परिषद ही निर्णय के लिए अधिकृत इकाई है। आगे अभाविप ने बताया व्यवस्थाओं को डिजिटल करना स्वागत योग्य है परंतु इस हेतु आत्मनिर्भर ना होकर किसी और पर आधारित हो जाना यह विश्वविद्यालय के विकास में बाधा की समान है। इसमें सभी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों की डेटा की सुरक्षित होने की गारंटी क्या होगी? अभी भी कुलपतियों के पास इसका संतोषजनक उत्तर नहीं है। कर्मचारियों का वेतन, विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप आदि का बैंक अकाउंट लिंक होने के कारण भी वृहत धोखाधड़ी की संभावना है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आगे बताया कि हम आज तक सभी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में समानता नहीं ला सके। सभी रिक्त शैक्षिक व अशिक्षित पदों पर भर्ती नहीं कर सके वाह विश्वविद्यालयों को मिलने वाली सालाना अनुदान में भी पिछली सरकार में कटौती की है। ऐसे में हम कैसे आईयूएमएस के स्वप्नों को साकार होते हुए देख सकते हैं। ऑटोमेशन की व्यवस्था में प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए टेलरमेड सिस्टम होना चाहिए। उसमें छात्रों की द्वारा दी गई जानकारियों की सुरक्षा संबंधित विश्वविद्यालय के हाथ में ही होना चाहिए एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने की प्रावधान किए गए हैं ताकि अन्य शोध और अध्यापन अधिक उपयोगी प्रभावी हो सके। आई यू एम एस राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत है। अभाविप ने कुलाधिपति से सभी बिंदुओं के संदर्भ में इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा कर इसे निरस्त करने की मांग की और बताया कि यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था में ना सिर्फ जटिलता पैदा करेगी बल्कि कई बिंदुओं पर यह व्यवहारिक भी नहीं है एवं आईयूएमएस निरस्त नहीं किया जाने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सम्पूर्ण प्रदेश में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। ज्ञापन के दौरान मुख्य रूप से जिला संयोजक मयंक राठौर, नगर मंत्री विवेक धाकड़, वेदान्श सविता, आदित्य पाठक, प्रद्युमन गोस्वामी, नगर उपाध्यक्ष कौशल यादव, एकता शर्मा, संदीप शर्मा, अविनाश समाधिया, सचिन सारस्वत, रत्नेश तिवारी, मनशिका गोयल, निहारथी गोयल, प्रियांश दुबे, आदित्य राठौर,पार्थ नरवरिया,सागर तिवारी,मंजीत के साथ 2 दर्जन से अधिक छात्र-छात्रा मौजूद रहे एवं इस दौरान सभी छात्र छात्राओं ने कोविड-19 की सभी गाइडलाइन का पालन किया और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ज्ञापन सौंपा।