महामारी के बीच कोरोना संक्रमितों का इलाज नहीं करेगा जूडा!
मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर्स अपनी मांगें मनवाने पर अड़े
भोपाल। कोरोना महामारी में मप्र सरकार जहां एक ओर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा कर रही है। वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमितों की धड़कने बढ़ने लगी हैं। दरअसल, मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स की एक बार फिर हड़ताल की आहट सुनाई दे रही है।
नहीं होगा इलाज
जूनियर डॉक्टर्स ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है इस बार अगर उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं हुए तो फिर 6 मई से वो इमरजेंसी सेवाएं रोक देंगे। इतना ही नहीं, सात मई से कोविड मरीजों के इलाज से भी जूनियर डॉक्टर्स ने इनकार कर दिया है।
सिर्फ मिला आश्वासन
गौरतलब है कि इससे पहले जूनियर डॉक्टर्स ने अपनी मांगें पूरी न होने पर 5 अप्रैल को हड़ताल की चेतावनी दी थी। सरकार की ओर से आश्वासन मिलने और कोरोना के बिगड़ते हालात को देखते हुए उन्होंने ये हड़ताल टाल दी थी, लेकिन एक बार फिर जूनियर डॉक्टर्स असोसिएशन ने मांगें पूरी न होने पर हड़ताल की चेतावनी दी है।
सरकार ने की थी बातचीत
पहले जब जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल की चेतावनी दी थी तो सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई थी। खुद चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग जूनियर डॉक्टर्स से मिलने हमीदिया हॉस्पिटल गए थे और उन्हें ये भरोसा दिया था कि सरकार जल्द उनकी मांगों पर फैसला लेगी। करीब महीने भर तक मांगें पूरी नहीं होने पर जूनियर डॉक्टर्स एक बार फिर हड़ताल की चेतावनी दे रहे हैं।
जूडा की पांच सूत्रीय मांगें
सरकार की ओर से 6 फीसदी सालाना मानदेय बढ़ाने का वायदा पूरा किया जाए। जूनियर डॉक्टरों के इलाज की बेहतर व्यवस्था की जाए। कोरोना के दौरान प्रति महीने 10 हजार रुपये मानदेय देने का वायदा पूरा किया जाए। जूनियर डॉक्टर्स को ग्रामीण सेवा के बंधन से मुक्त किया जाए। साथ ही कोरोना काल में सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र दिया जाए जिसका फायदा सरकारी भर्तियों में मिले।
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