भोपाल, जिस तहर कुम्हार गीली मिट्टी को आकर्षक बर्तनों का आकार देता है, उसी तरह चितरंजन कुमार छात्रों का भविष्य गढ़ रहे हैं। वे मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग और मेडिकल के क्षेत्र में कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले छात्रों के सपनों को साकार कर रहे हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं, चितरंजन कुमार (बी.टेक) की। जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बच्चों का भविष्य संवारने का वीणा उठाया है। बच्चों की पढ़ाई में अपना कॅरियर बनाने का विकल्प चुना, जिसे वो सबसे ज्यादा पसंद करते थे। उन्हें पढऩा और पढ़ाना सबसे ज्यादा पसंद था। इससे पहले चितरंजन कुमार ने कोटा में तीन साल कोचिंग संस्थानों में पढ़ाया। फिर इंदौर में चार साल बच्चों को पढ़ाया। और अब पिछले सात साल से भोपाल में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। इनके पढ़ाने की विधि काफी सरल और स्पष्ट है। चितरंजन का जोर छात्र-छात्राओं की अवधारणा को विकसित करने पर रहता है। जब तक कोई टापिक या सवाल बच्चों के समझ में नहीं आ जाता तब तक वे बच्चों को पढ़ाते और समझाते हैं। उनका मानना है कि बच्चों में विकसित अवधारणा और ज्यादा से ज्यादा अभ्यास की जरूरत है। उनका कहना है कि बच्चों को संख्यात्मक परीक्षण पेपर और प्रश्नों के व्यापक अभ्यास पर विचार करना चाहिए। चितरंजन कुमार की एक सबसे बड़ी खूबी यह है कि बच्चों को पढ़ाते समय संबंधित विषय का तब तक अभ्यास कराते हैं, जब तक छात्र-छात्राओं को पूरी तरह से अभ्यास न हो जाए। गौरतलब है कि चितरंजन कुमार के पढ़ाए हजारों छात्र-छात्राएं मेडिकल और इंजीनियरिंग में मप्र का नाम रोशन कर रहे हैं।