नवंबर के प्रथम सप्ताह में होंगे 28 सीटों पर उपचुनाव!

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सितंबर के अंतिम सप्ताह में अधिसूचना जारी करेगा आयोग

भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों के विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने तैयारी तेज कर दी है। आयोग के सूत्रों से मिले संकेत के अनुसार संभवत: सितंबर के अंतिम सप्ताह में आचार संहिता की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। नवंबर के प्रथम सप्ताह में मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

चुनाव आयोग जहां चुनाव कराने की तैयारी में जुटा हुआ है, वहीं राजनीतिक पार्टियों ने मैदान में मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस ने जहां 15 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिया है, वहीं बसपा ने 8 सीटों पर। उधर भाजपा के 25 प्रत्याशी लगभग तय हैं।

20 अक्टूबर को सिलावट और राजपूत का इस्तीफा तय
प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव से पहले शिवराज सरकार के दो मंत्री तुलसी राम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत इस्तीफा दे सकते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए दोनों नेताओं ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। वे विना विधानसभा सदस्य के मंत्री हैं। इनका छह महीने का कार्यकाल अगले महीने 20 अक्टूबर को पूरा हो रहा है। इसी दिन दोनों मंत्रियों का कार्यकाल स्वत: समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके 29 दिन बाद 21 अप्रैल को तीन विधायक नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल एवं मीना सिंह एवं दो पूर्व विधायक तुलसी राम सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली थी। दोनों मंत्री 20 अक्टूबर को छह महीने का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, ऐसे में उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। जिस तरह से प्रदेश में चुनावी गतिविधियां चल रही हैं और चुनाव आयोग तैयारियों में जुटा हैं। उसके अनुसार ऐसी संभावना है कि प्रदेश में कभी भी उपचुनाव का ऐलान हो सकता है। ऐसे में अक्टूबर के आखिरी या फिर नवंबर में उपचुनाव हो सकते हैं। जब दोनों मंत्री अपना छह महीने का कार्यकाल पूरा करेंगे, तब संभवत: प्रदेश में आचार संहिता प्रभावी होगी। ऐेसे में उन्हें न तो फिर से मंत्री बनाया जा पाएगा और न ही सरकार में कोई पद दिलाया जाएगा। यदि वे उपचुनाव जीतकर आएंगे, तभी वे मंत्रिमंडल में शामिल हो पाएंगे।

बिना विधायक के फिर नहीं बनेंगे मंत्री
कांग्रेस शासन काल में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इब्राहिम कुरैशी को बिना विधायक के मंत्री बनाया था। दिग्विजय ने कुरैशी का छह मंत्री का कार्यकाल पूरा होने के बार फिर से छह महीने तक मंत्री बनाया था। बिना विधायक के छह-छह महीने के दो कार्यकाल तक मंत्री रहने का यह देश में एक मात्र अपवाद है। हालांकि बाद में लोकसभा के महासचिव सुभाष कश्यप ने स्पष्ट किया था कि बिना विधायक के किसी को छह महीने का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से मंत्री नहीं बनाया जा सकता है।