राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट 2026, लोक संगीत के साथ 'आईस्टार्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ राजस्थान' का शुभारंभ

राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट 2026, लोक संगीत के साथ 'आईस्टार्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ राजस्थान' का शुभारंभ

जयपुर। राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट—2026 के पहले दिन रविवार को 'आईस्टार्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ राजस्थान'(आईएफएफओआर) का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध भपंग वादक युसूफ खान और उनके समूह ने वाद्य यंत्र भपंग के एक तार के संगीत पर गायन कर फेस्टिवल का सांस्कृतिक आगाज किया। उन्होंने लोक संगीत की जीवंत परंपरा को भी नई ऊर्जा देकर दर्शकों की तालियां बटोरी। तीन दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल में पहले दिन 24 फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। साथ ही, विभिन्न पैनल डिस्क्शन में फिल्म इंडस्ट्री से एक्सपर्ट ने विचार रखे।  

साझा किए पटकथा से परदे तक के अनुभव

राजस्थान के सांस्कृतिक परिदृश्य में सिनेमा और लोक कला के प्रेमियों के लिए उद्घाटन पैनल 'अंडरस्टैंडिंग सिनेमेटिक क्रॉफ्ट : फ्रॉम स्क्रिप्ट टू स्क्रीन' आयोजित हुआ। इसमें फिल्म निर्माण के विभिन्न आयामों की यात्रा पर विभिन्न विधाओं से जुड़े प्रतिष्ठित निर्देशक, कलाकार, सिनेमोटोग्राफर ने सार्थक संवाद किया। पैनल में अमर सिंह चमकीला फेम साउंड डिजाइनर एवं मिक्सर धीमन कर्माकर, फिल्म एडिटर नितिन बैद, सिनेमेटोग्राफर लॉरेंस डी’कुन्हा, अभिनेता नमित दास, सुकांत गोयल, अभिनेत्री इंदिरा तिवारी और फिल्म निर्देशक निधि सक्सेना ने क्षेत्रीय भाषाई सिनेमा की संभावनाओं को लेकर विचार साझा किए गए। फेस्टिवल डायरेक्टर शिल्पी बत्रा ने पैनल डिस्क्शन का संचालन किया। एक्सपर्ट ने सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भाषाई सिनेमा को मजबूत स्टोरीटेलिंग इकोसिस्टम से विकसित किए जाने के बारे में चर्चा की।  

पैनल डिस्क्शन के दौरान अभिनेत्री इंदिरा तिवारी ने कहा कि चाहे स्क्रिप्ट हो या अभिनय, उसमें अपनी मिट्टी की खनक होनी चाहिए। आपकी क्रिएटिविटी में मिलावट की कोई जगह नहीं हो, तभी सिनेमा और अधिक मजबूत बनकर घर—घर तक पहुंचेगा। निधि सक्सेना ने कहा कि फिल्म मेकिंग में जमीन से जुड़ाव भी दिखाई देना चाहिए। सिनेमेटोग्राफर लॉरेंस डी’कुन्हा ने कहा कि फिल्म मेकिंग में सिनेमेटोग्राफी सबसे अहम विधा है। इसके लिए आपके पास इमेजिनेशन का खजाना होना चाहिए। 

रविवार को 24 फिल्मों की स्क्रीनिंग

फेस्टिवल में पहले दिन 24 से अधिक फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। 'कैसी ये पहेली' फीचर फिल्म से स्क्रीनिंग की शुरूआत हुई। इसके बाद डॉक्यूमेंट्री 'द राइज वॉल्यूम, ह्यूमंस इन द लूप, नानेरा सहित अन्य फिल्में दिखाई गई। फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान हॉल्स में इमर्सिव आर्ट इंस्टॉलेशंस प्रदर्शित हुए। 'आईएफएफओआर वॉकथ्रू' में सुधीर कासलीवाल की फोटोग्राफी और जयपुर रग्स की 'मनचाहा' संग्रह का प्रदर्शन किया गया, जिसमें राजस्थान की पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक विजुअल कथाओं के संबंध देखने को मिलें।

उल्लेखनीय है कि यह फिल्म फेस्टिवल राजस्थान की एवीजीसी-एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी) नीति का आधार स्तंभ है। यह मात्र फिल्म फेस्टिवल नहीं बल्कि राजस्थान के स्टोरीटेलिंग इकोसिस्टम को समृद्ध करने के लिए रणनीतिक मंच है।