मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पहल पर टाइग्रेस सुंदरी को मिली कैद से आजादी
भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पहल पर हो रही टाइग्रेस सुंदरी की वापसी की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।
उडीसा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व में कैद बाघिन सुंदरी को लेने प्रदेश वन विभाग की एक टीम आज अंगुल पहुंची गई है। टीम का नेतृत्व एसीएफ एसके सिन्हा कर रहे हैं। उनके दल में एक डॉक्टर व टायग्रेस को रिलोकेट करने वाले तीन फोरेस्ट एक्सपर्ट भी शामिल हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि टीम जल्द ही सुंदरी को लेकर प्रदेश लौट आएगी। इसके बाद सुंदरी को कान्हा टाइगर रिजर्व में रखा जाएगा। गौरतलब है कि सुंदरी नवंबर 2018 से बाड़े में कैद है, जहां उसकी ठीक से देखरेख भी नहीं हो रही है। सुंदरी को 29 जून 2018 को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सतकोशिया भेजा गया था।
मध्य प्रदेश के जंगलों से ओडिशा भेजी गई बाघिन सुंदरी की व्यथा-कथा सुनकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को व्यथित कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखकर न सिर्फ अपने दुख का इजहार किया था, बल्कि कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन को रखने का इंतजाम होने तक सतकोशिया टाइगर रिजर्व में ही उसकी बेहतर देखरेख करने का अनुरोध भी किया था।
बाघ विहीन हुए सतकोशिया टाइगर रिजर्व को फिर से आबाद करने के लिए बाघिन सुंदरी और बाघ महावीर को वहां भेजा गया था। एनटीसीए ने बाघ संरक्षण कार्यक्रम के तहत तीन बाघ और तीन बाघिन भेजने की अनुमति दी थी। शेष चार बाघों को भेजने की प्रक्रिया शुरू होती, उससे पहले ही नवंबर 2018 में बाघ महावीर का शव पार्क की झाड़ियों में मिला था। बाघ को जहर देखकर मारा गया था। वहीं सुंदरी को भी मारने का प्रयास हुआ। जिसे देखते हुए उसे एक बाड़े में कैद कर दिया गया। इसके पहले इसे महाराष्ट्र से तीन लोगों को मारने के जुर्म में भोपाल के वन विहार में एकांत कारावास के लिए भेजा गया था। यहां से बांधवगढ और फिर सतकोशिया।
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