कोविड केयर सेंटर तैयार, 8 हजार मरीजों को मिलेगी सुविधा

कोविड केयर सेंटर तैयार, 8 हजार मरीजों को मिलेगी सुविधा

भोपाल
कोरोना के शुरुआती लक्षण के बाद सावधानी और प्रायमरी उपचार में लेटलतीफी से बिगड़े हालातों के बाद अब सरकार ऐसे मरीजों को सेपरेट रूम में होम आइसोलेट कराने के साथ नए बनाए गए कोविड केयर सेंटर्स में भर्ती कराने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में सेंटर तैयार करने और बिस्तर क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री खुद आज बीना में तैयार हो रहे कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे। बड़े शहरों में और भी नए सेंटर बनाए जाने की तैयारी है।

प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ राज्य सरकार द्वारा कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) तैयार करने और उनमें अधिक से अधिक बेड की उपलब्धता के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। अब तक तैयार हुए 185 कोविड केयर सेंटर्स में 8 हजार मरीजों के लिए बेड क्षमता तैयार की जा चुकी है और नए सेंटर बनाने पर भी काम चल रहा है। इस बीच सरकार ने कलेक्टरों को कोविड केयर सेंटर में पहुंचने वाले मरीजों के खाने-पीने और अन्य सुविधाओं के लिए राशि का आवंटन कर दिया है। कलेक्टरों को यह अधिकार दिए गए हैं कि एक मरीज के नाश्ते-खाने, पीने पर एक हजार रुपए रोज खर्च कर सकते हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नए कोविड केयर सेंटर्स के निर्माण और वहां उपचार के लिए जरूरी सुविधाओं की खुद समीक्षा भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि आक्सीजन की डिमांड पूरी करने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर जुटी है। आॅक्सीजन का वैज्ञानिक तरीके से उचित उपयोग की व्यवस्थाओं के लिए आॅक्सीजन आॅडिट संबंधित जिले के प्रभारी अधिकारी कराएंगे। इससे आॅक्सीजन की अनावश्यक खपत में कमी होगी और जरूरतमंद के लिए आॅक्सीजन की उपलब्धता में वृद्धि होगी। उन्होंने आॅक्सीजन के युक्तियुक्त उपयोग पर जोर देते हुए स्टेपडाउन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस रोगी को हाई फ्लो की जरूरत हो उसे वह दी जाए।

सरकार ने तय किया है कि गांव या शहर के किसी मोहल्ले में कुछ घरों में संक्रमण है तो उस क्षेत्र को माइक्रो कंटेनमेंट एरिया बनाकर संक्रमण को उस क्षेत्र तक रोकना और वहीं समाप्त करना होगा। इसलिए अब माइक्रो कंटेनमेंट एरिया बनाने की नीति भी इस लड़ाई में सम्मिलित की जा रही है। यहां जरूरत का सामान कुछ लोगों से मंगवाने की छूट दी जाएगी।

सीएम चौहान कह चुके हैं कि यह जरूरी है कि उपचार की गाइड लाइन, आॅक्सीजन एवं रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग का एक निश्चित प्रोटोकॉल तैयार किया जाए। यदि रोगी को अन्यत्र भेजना आवश्यक हो तो उसे उचित मेडिकल सपोर्ट के साथ ही भेजा जाए। प्रदेश में अब तक 7 विभिन्न कंपनियों से रेमिडीसिविर इंजेक्शन के एक लाख 88 हजार से अधिक डोज प्राप्त हुए हैं। 30 अप्रैल तक 95 हजार डोज प्राप्त होने की सम्भावना है। इस कोटे को बढाकर 1.50 लाख डोज करने का अनुरोध किया गया है। इंजेक्शन की आपूर्ति प्रदेश के उन निजी अस्पतालों में भी नि:शुल्क करने का निर्णय लिया गया है, जो सरकार के साथ अनुबंधित हैं।