कोरोना के बढ़ते संकट में ड्यूटी करने से बच रहे नए डॉक्टर, कार्रवाई की तैयारी
भोपाल
कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर और इलाज करने के लिए डॉक्टर्स की कमी पड़ रही है। इंदौर और भोपाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से इंटर्नशिप पूरी करने वाले 235 डॉक्टर्स की बॉन्ड पोस्टिंग जिलों में सीएमएचओ के अधीन की गई है, लेकिन इनमें से 79 फीसदी डॉक्टर्स ने अपनी ज्वाइनिंग ही नहीं दी। 30 मार्च को 235 डॉक्टर्स को जिलों का आवंटन करने के बावजूद 20 दिनों में ज्वाइनिंग न देने वाले 186 डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने चिकित्सा शिक्षा आयुक्त निशांत बरवडेÞ को पत्र लिखा है।
भोपाल में 48, इंदौर में 32, सीहोर में 14, उज्जैन में 13, रतलाम में नौ, बडवानी में आठ, बुरहानपुर में सात, खंडवा, देवास में छह-छह, राजगढ़, बैतूल में पांच-पांच, होशंगाबाद, खरगोन, शाजापुर, विदिशा, नीमच में चार-चार, धार, रायसेन में तीन-तीन, हरदा, मंदसौर में दो-दो, झाबुआ, अलीराजपुर में एक-एक डॉक्टर्स ने अब तक ज्वाइनिंग नहीं दी है। अब इनके खिलाफ बॉन्ड नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई होगी।
इंदौर के एमवाय मेडिकल कॉलेज से पास आउट होने वाले 125 और भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी करने वाले 110 डॉक्टर्स की 30 मार्च को अनिवार्य बंधपत्र ग्रामीण सेवा के तहत बॉन्ड पोस्टिंग की गई थी। इन्हें 15 दिन में ज्वाइनिंग देनी थी। एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवाएं बॉन्ड पीरियड में देनी होतीं हैं, लेकिन कोरोना के संकट के चलते अब तक 79 फीसदी डॉक्टर्स ने ज्वाइन नहीं किया।
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