कोरोना काल की आड़ में नहीं हो पाई स्ट्रीट डॉग्स फर्जी नसबंदी की जांच

कोरोना काल की आड़ में नहीं हो पाई स्ट्रीट डॉग्स फर्जी नसबंदी की जांच

भोपाल
कोरोना काल के कर्फ्यू और आपाधापी के दौर के कारण नगर निगम में आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर नौ करोड़ रुपए खर्च करने के मामले की जांच शुरू नहीं हो पाई है। शहर की हालत यह है कि इस समय लोग शहर की जनता आवारा कुत्तों से परेशान है, जिनकी तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। नगर निगम सालों से इन आवारा कुत्तों की नसबंदी करवा रहा है, लेकिन उसका कोई असर नजर नहीं आता।

लगभग नौ  करोड़ रुपए की राशि नगर निगम ने पिछले पांच सालों में इन आवारा कुत्तों के नसबंदी आॅपरेशनों पर फूंक दी है। लेकिन उसके बाद भी नतीजा सिफर ही रहा है। निगम प्रशासन ने कुत्तों की नसबंदी की शुरुआत वर्ष 2014 में की थी। तब निगम के आंकड़ों में इनकी संख्या 25 हजार थी। इसके बाद साल-दर-साल नसबंदी प्रक्रिया भी चली। अब तो इस काम में सालाना डेढ़ करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं।

राजधानी में  नसबंदी के बाद भी जिस तरह से आवारा कुत्तों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है इसके लिए नगर निगम के आला अफसर ही जिम्मेदार हैं जिनकी लापरवाही से नीचे कोई कार्रवाई नहीं होती है।