कोरोना के कारण गर्भवती महिलाओं की HIV टेस्टिंग में 25% गिरावट
भोपाल
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हुर्इं हैं। संकटकाल में जहां लोग संक्रमण के ड़र से अस्पतालों में उपचार कराने नहीं गए। कोरोना संकट के साल में गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच भी नहीं हो पाई। मप्र एड्स नियंत्रण सोसाइटी के आंकडों पर गौर करें तो साल 2019 की तुलना में पिछले वर्ष कोरोना संकट के दौरान 25 फीसदी कम गर्भवती महिलाओं की एचआईवी टेस्टिंग हो पाई है। 2019 में 71 फीसदी टेस्टिंग हुई थी जबकि 2020 में सिर्फ 46 प्रतिशत महिलाओं की एचआईवी जांच हो सकी। कम होती टेस्टिंग को बढ़ाने के लिए मप्र एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने सीएचओ को टेÑनिंग देनी शुरू की है।
एमपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी के अनुसार सालाना 21 लाख गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य अनुमानित तौर पर रखा जाता है। लेकिन कोरोना संकट के दौरान ये आंकड़ा घटा है। ग्रामीण इलाकों में एचआईवी की जांच को बढ़ाने के लिए अब एड्स कंट्रोल सोसाइटी प्रदेश के लगभग ढाई हजार हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ आॅफीसर्स को टेÑनिंग देकर किट से जांच कराने की तैयारी शुरू की है। यदि किट से टेस्टिंग में रिजल्ट रिएक्टिव आता है तो महिला को आईसीटीसी रेफर करके उसके उपचार और सुरक्षित प्रसव की तैयारी शुरू की जाएगी। आईसीटीसी पर की गई जांच में यदि एचआईवी कन्फर्म पॉजिटिव आया तो उसके गर्भस्थ शिशु को प्रसव के दौरान एचआईवी संक्रमण से बचाने के लिए व्यवस्था की जा सके।
वर्जन
प्रदेश भर में टेस्टिंग बढ़ाने के लिए हमने तैयारी शुरू की है। इसके लिए सीएचओ को टेनिंग दी जा रही है। समय से जांच होने पर जल्दी पहचान हो सकेगी और उपचार भी समय से शुरू हो जाएगा।
केडी त्रिपाठी, परियोजना संचालक, मप्र एड्स नियंत्रण सोसाइटी
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