पोहरी विधानसभा पर त्रिकोणीय मुकाबला होना निश्चित

0
3

सुरेश धाकड़ पर भारी पड़ेंगे वोटकटवा

पोहरी से कैलाश पर बसपा ने फिर जताया भरोसा

भोपाल। उपचुनाव में शिवपुरी जिले की पोहरी विधानसभा पर त्रिकोणीय मुकाबला होना निश्चित है। यहां से भाजपा प्रत्याशी के रूप में राज्यमंत्री सुरेश धाकड निश्चित है, वहीं बसपा ने अपने प्रत्याशी के रूप मे 2018 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे कैलाश कुशवाह पर फिर से विश्वास जताया है। भाजपा और बसपा के बाद अब सबकी निगाहें कांग्रेस पर टिकी हुई हैं क्योंकि कांग्रेस द्वारा अभी तक अपने प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं किया है। राजनितिक सूत्रों की मानें तो कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस धाकड़ उम्मीदवार को प्रत्याशी के रूप मे लाती है तो भाजपा के प्रत्याशी पर समाजिक मतों का असर होगा।

शिवपुरी जिले की पोहरी सीट पर भाजपा के भावी प्रत्याशी सुरेश धाकड़ की राह आसान नहीं दिख रही है। यहां कांग्रेस और बसपा को मात देने के लिए उन्हें वोटकटवा उम्मीदवारों से पार पाना होगा। पोहरी सीट पर 2018 में वोटकटवा उम्मीदवारों को 13,008 वोट मिले थे, जबकि लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेश धाकड़ ने बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाहा को 7,918 वोट से हराया था। उपचुनाव में वोटकटवा उनकी राह में खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। 2018 में इस सीट पर 1,63,666 वोट पड़े थे और 20 प्रत्याशी मैदान में थे। सुरेश धाकड़ को 60,654, बसपा के कैलाश कुशवाह को 52,736 और भाजपा के प्रहलाद भारती को 37,268 वोट मिले थे। उपचुनाव की तैयारी में बसपा की तैयारियों में तेजी आ गयी है। बसपा ने पोहरी से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। पोहरी से पिछला चुनाव बसपा के टिकट पर लड़कर दूसरे स्थान पर रहने वाले कैलाश कुशवाह को उम्मीदवार बनाया है।

पोहरी में दरअसल जातिगत आंकडों की बात करें तो यहां धाकड़ और कुशवाह के साथ यादव समाज का बाहुल है। एससी-एसटी का वोट बैंक भी अधिक है। इसलिए पार्टी ने इस बार यहां फिर से कैलाश कुशवाह पर दांव खेला है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के प्रहलाद भारती का गणित बिगाड़ दिया था। उन्हे तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया था। हालांकि जीत कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राठखेडा को मिली थी। लेकिन माना जा रहा है कि कुशवाह और दलित समीकरण बनाने में कैलाश सफल रहे थे। इसलिए कुछ दिन पहले तक कांग्रेस से भी उनकी उम्मीदवारी की चर्चा थी।

पोहरी में चुनावी गणित
2013 के चुनाव में बीजेपी के प्रहलाद भारती ने 45209 वोट हासिल कर बीएसपी के हरिवल्लभ शुक्ला को 19 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। 2008 के चुनाव में भी प्रहलाद भारती ने जीत हासिल की थी। भारती को 53068 वोट मिले थे। इस बार भी बीएसपी के हरिवल्लभ शुक्ला 49443 वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे। बता दें कि पोहरी विधानसभा सीट पर भी बसपा खासी मजबूत है। वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था। उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी। लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में बीजेपी सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे।

त्रिकोणीय मकाबले के आसार
शिवपुरी जिले की पोहरी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। बीजेपी से लोकनिर्माण राज्य मंत्री सुरेश धाकड़, बसपा से कैलाश कुशवाहा और कांग्रेस से हरिवल्लभ शुक्ला मैदान में होंगे। 2018 में केवल हरिवल्लभ बाहर थे लेकिन अब वह संभवत: अपना अंतिम चुनाव पोहरी से लडऩे जा रहे हैं। गतदिनों उनके घर पर आकर दिग्विजयसिंह ने नाश्ते की टेबिल पर जलेबी पोहा के साथ टिकट की हरीझंडी दे दी है। पुख्ता खबर यही है कि कमलनाथ ने पोहरी से पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला को टिकट देने का निर्णय ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने भी हरिवल्लभ के घर पहुँचकर उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम मुहर लगा दी है। जहां तक बसपा के उम्मीदवार का सवाल है, वह बीजेपी के लिए इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि कुशवाहा बिरादरी की संख्या यहां 15 से 17 हजार के मध्य है और वोटिंग टर्नआउट के मामले में यह 100 फीसदी गिनी जाती है। बसपा के खाते में जाटव वोटरों के ट्रांसफर का फायदा बीजेपी को होता है तो कुशवाहा वोटरों का सीधा नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ेगा। बसपा ने कैलाश कुशवाहा को फिर से टिकट दी है जो 2018 में 52736 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे थे। मौजूदा बीजेपी प्रत्याशी सुरेश धाकड़ 60654 वोट लेकर जीते थे। उपचुनाव में अब त्रिकोणीय मुकाबला होगा क्योंकि तीनों प्रत्याशी हैवीवेट हैं। फौरी तौर पर बसपा ने यहां बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि कुशवाहा बिरादरी के वोट परम्परागत रूप से यहां बीजेपी को जाते रहे हैं। पहली बार 2018 में कैलाश ने इस बिरादरी को बसपा के साथ पोलराइज्ड कर दिया था जिसका नुकसान सीधे बीजेपी को हुआ था। कैलाश को ब्राह्मण एवं अन्य छोटी जातियों के वोट भी मिल गए थे। हालांकि बसपा टिकट की घोषणा तक कैलाश ने कांग्रेस से भी उम्मीदवारी के भरसक प्रयास किये थे। कमलनाथ के साथ उनकी बैठक भी हुई लेकिन कांग्रेसियों के विरोध के चलते बात बन नहीं पाई।

बीजेपी को इस सीट पर धाकड़ (किरार) वोटरों के अलावा पार्टी के परंपरागत आधार पर ज्यादा भरोसा है। हालांकि शिवपुरी जिले में इस सीट पर बीजेपी का कैडर सबसे कमजोर कहा जा सकता है क्योंकि यहाँ चुनावी गणित कैडर की जगह जाति के प्रभाव से निर्धारित होता है। यही कारण है कि कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस का पूरा वोट बैंक कोलैप्स होता रहा है। 2003 एवं 2008 के नतीजे इस तथ्य की तस्दीक करते है। बीजेपी के लिए न केवल कुशवाहा बल्कि रावत, ब्राह्मण, यादव, गुर्जर एवं निर्णायक आदिवासी वोटरों को भी साधने की बड़ी चुनौती इस उपचुनाव में सामने होगी। किरार वोटरों के एक वर्ग में भी मंत्री सुरेश धाकड़ को लेकर नाराजगी का भाव है। हरिवल्लभ शुक्ला इस सीट से 1980 से चुनाव लड़ते रहे हैं। उनके विरोधियों की भी यहां भरमार है। उनका प्रयास होगा कि उपचुनाव की लड़ाई को एंटी किरार पोलराइजेशन पर मोड़ा जाए क्योंकि 2008 से लगातार किरार जाति के एमएलए ही यहां जीत रहे है।

सुरेश धाकड़ की स्थिति
बीजेपी कैडर के साथ राज्यमंत्री अभी भी कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। बसपा अगर अन्य छोटी जातियों में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रही तो मामला रोचक हो जायेगा। 2018 के प्रदर्शन पर भी कैलाश कुशवाहा कायम रहे तो हार-जीत का निर्णय उन्ही के द्वारा होगा। इस सीट पर बीजेपी को आदिवासी वर्ग के बीच व्यापक घेराबंदी की दरकार है क्योंकि परम्परागत रूप से यह बड़ा वोट बैंक अभी भी कांग्रेस के साथ जाता है। पिछली बार सुरेश धाकड़ की जीत में इस वर्ग का निर्णायक योगदान था। हालांकि 2018 में उन्हें धाकड़ किरार समाज का मात्र 40 फीसदी ही वोट मिल सका था जो इस बार बढऩे के आसार है। इसके बावजूद पोहरी में बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में सुरेश धाकड़ के लिए मंत्री बनने के बाद भी हालात 2018 जैसे तो बिल्कुल नहीं हैं। कांग्रेस से हरिवल्लभ शुक्ला की टिकट घोषित होते ही अनेक नेताओं के बीजेपी का दामन थामने की पूरी संभावना है। कुल मिलाकर बसपा ने यहां भी उपचुनाव को त्रिकोणीय तो बना ही दिया है।

300 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात
गतदिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी जिले के पोहरी में विभिन्न विकास कार्यों और निर्माण कार्यों का शिलान्यास व भूमि पूजन किया। इस दौरान पोहरी में सरकुला मध्यम सिंचाई योजना का भूमि पूजन भी किया गया। यह योजना 226.62 करोड़ की है जिससे 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। कार्यक्रम के दौरान आमसभा में भीड़ के एक हिस्से ने ओबीसी आरक्षण को लेकर शोर-शराब शुरू कर दिया, जिससे असहज स्थिति पैदा हो गई।