लॉकडाउन में दुरंतो दूध स्पेशल ट्रेन चला कर दूध पहुंचा रहा रेलवे

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नई दिल्ली, लॉकडाउन की वजह से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बच्चों के दूध की कमी नहीं हो, इसके लिए रेलवे दुरंतो दूध स्पेशल ट्रेन चला कर दूध पहुंचा रहा है। छह मिल्क टैंकरों की एक विशेष ट्रेन आज शाम 05:40 बजे दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन दूध टर्मिनल पर पहुंच रही है। इन टैंकरों में करीब ढाई लाख लीटर गाय का दूध भरा है। उल्लेखनीय है कि बच्चों को गाय का दूध ही पिलाना फायदेमंद होता है।

28 मार्च को भी पहुंची थी दूध स्पेशल ट्रेन
मदर डेयरी के एक अधिकारी के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में गाय के दूध की आपूर्ति के लिए तरल दूध आंध्र प्रदेश में तिरूपति के आसपास के इलाकों से मंगाया जाता है। आमतौर पर वहां से दूध का टैंकर किसी न किसी रेलगाड़ी में गार्ड डिब्बे के पीछे जोड़ दिया जाता है। इन दिनों लॉकडाउन की वजह से ट्रेनों का संचालन बंद है। इसलिए दूध के छह टैंकरों को जोड़ कर एक रेलगाड़ी का रूप दे दिया गया है। पिछले सप्ताह 28 मार्च को एक दूध स्पेशल गाड़ी यहां पहुंची थी। दूसरी गाड़ी आज पहुंच रही है।

पहले 2-3 टैंकर रोज आते थे
लॉकडाउन से पहले मदर डेयरी के हर रोज दो से तीन टैंकर आंध्र प्रदेश के रेनीगुंटा से आते थे। उस समय इन टैंकरों को मिलेनियम एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस और आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति में जोड़ दिया जाता था। अब ये गाड़ियां रद्द हैं। दिल्ली एनसीआर में गाय के दूध की आपूर्ति न घटे, इसके लिए दूध स्पेशल चलाने का फैसला हुआ। चूंकि ये टैंकर मेल या एक्सप्रेस गाड़ियों में जोड़ा जाता है, इसलिए ये 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम हैं।

रास्ते में दूध स्पेशल ट्रेन के पांच स्टॉपेज
रेल अधिकारियों का कहना है कि दूध दुरंतो स्पेशल शनिवार सुबह आठ बजे रेनीगुंटा से रवाना हुई है। रास्ते में यह गाड़ी क्रू चेंजिंग के लिए गुंतकल, सिकंदराबाद, बल्लारशाह, नागपुर और झांसी स्टेशनों पर रूकती हुई शाम में करीब पौने छह बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचती है। वापसी में भी यह गाड़ी इन्हीं स्टेशनों पर रुकती हुई रेनीगुंटा पहुंच जाएगी। निजामुद्दीन में पहले से ही दूध टर्मिनल बना हुआ है, जहां से दूध सड़क पर चलने वाले टैंकर में ट्रांसफर कर दिया जाता है और वह फिर प्लांट में पहुंच जाता है।

चलता फिरता थर्मस है यह टैंकर
दूध के परिवहन में तापमान बड़ा ही महत्व रखता है। दूध का तापमान जैसे ही 8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचता है, यह खराब होना शुरू हो जाता है। इसलिए इसकी ढुलाई 3 डिग्री सेल्सियस पर की जाती है ताकि रास्ते में तापमान में एक-दो डिग्री की बढ़ोतरी भी हो जाए तो दिक्कत नहीं हो। रेलवे के दूध टैंकर को एक चलता फिरता थर्मस कह सकते हैं, क्योंकि इसमें पफिंग इंसुलेशन होता है। मदर डेयरी के एक अधिकारी बताते हैं कि यह एक महंगी प्रक्रिया है और सिर्फ टैंकर के पफिंग पर 70 से 80 लाख रुपये का खर्च हो जाता है। तब भी खर्च किया जाता है ताकि 36 घंटे की यात्रा में भी दूध खराब नहीं हो।