वैश्विक भारतीय वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं को आज संबोधित करेंगे पीएम मोदी

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नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन वैश्विक और प्रवासी भारतीय अनुसंधानकर्ताओं और शिक्षाविदों को एक मंच प्रदान करता है। प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय मूल के दिग्गजों को एक मंच पर लाना है जो दुनिया भर की अकादमिक और शोध संस्थाओं से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दो से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। मोदी ने ट्वीट कर कहा, ”कल के वैभव शिखर सम्मेलन में भाग लेने को उत्सुक हूं। यह सम्मेलन भारतीय मूल के वैश्विक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को साथ लाता है। दो अक्टूबर की शाम 6:30 बजे आप भी जुड़िए। इस सम्मेलन में 55 देशों के भारतीय मूल के 3,000 से अधिक वैज्ञानिक और शिक्षाविद तथा 10 हजार से अधिक प्रवासी वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन अभियान के और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए देश भर के सरपंचों और ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा है और कहा है कि इसके लक्ष्य को गांवों के सामुदायिक नेतृत्व की मदद से पूरा किया जा सकता है। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री ने जनता और ग्राम पंचायतों से जल जीवन अभियान को जन आंदोलन बनाए जाने की अपील की। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत वर्ष 2024 तक हर घर को जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जल शक्ति मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सरपंचों और ग्राम प्रधानों को 29 सितंबर को पत्र लिखकर जल जीवन अभियान के और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संपर्क किया है। हर घर जल के लक्ष्य को सरपंचों, ग्राम प्रधानों और गांवों के सामुदायिक नेताओं की सहायता से ही हासिल किया जा सकता है क्योंकि इसके क्रियान्वयन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने इस मौके पर जिक्र किया कि लोगों के योगदान से कैसे इस अभियान की सफलता इतिहास रच रही है। यह अभियान न सिर्फ जल आपूर्ति का सामधान करेगा बल्कि जलजनित बीमारियों से बचाने में भी मदद करेगा। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि शुद्ध पानी के मिलने से लोगों की सेहत भी सुधरेगी और इससे उनकी उत्पादकता भी बढ़ेगी, जिससे परिवार की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पानी के अभाव का सबसे अधिक असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ता है। पत्र में मोदी ने केंद्र सरकार द्वारा पिछले छह सालों में विकास के किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया।