सड़ा गेहूं वितरण के मामले में लीपापोती करने में जुटे अधिकारी

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भ्रामक रिपोर्ट से कलेक्टर को कर रहे गुमराह, वेयर हाउस से सोसायटियों में पहुंचा सड़ा गेहूं

amjad khan
शाजापुर। अनाज के नाम पर गरीबों की थाली तक सड़ा हुआ गेहूं पहुंचाने वाले अधिकारियों ने मामले में लीपापौती करना शुरू कर दिया है और इसीके चलते जिम्मेदार अधिकारियों ने स्वयं का दामन बचाने के चक्कर में परिवहनकर्ता के प्रतिनिधि पर कार्रवाई की गाज गिराते हुए उसे हटाकर जिला प्रशासन को भ्रामक जांच रिपोर्ट सौंपकर गुमराह करने का काम किया है। विभाग के अधिकारी पूरे मामले को दबाने में लगे हुए हैं और इसीके चलते वे वेयर हाउस पर भी सड़े हुए गेहूं के नही होने की बात स्वीकार करते हुए मामले का खंडन कर रहे हैं। जबकि मीडियाकर्मियों द्वारा वेयर हाउस से गेहूं के परिवहन के दौरान का पूरा वीडियो बनाया गया था जिसमें साफतौर पर सड़ा हुआ गेहूं गोदाम में रखा दिखाई दे रहा था, लेकिन इसके बाद भी अधिकारी वेयर हाउस पर किसी भी तरह का सड़ा हुआ गेहूं नही होने की बात कह रहे हैं। अधिकारियों की इसी मनमानी और वेयर हाउस संचालक के साथ सांठगांठ का पता लगाने के लिए पत्रकारों की टीमों ने वेयर हाउस से जिन सोसायटियों में गेहूं पहुंचाया गया था उसका स्टींग ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान शाजापुर की निपानिया डाबी, रिछौदा सहित सोसायटियों में अमानक स्तर का सड़ा हुआ गेहूं गरीबों में बांटा जाना सामने आया। हालांकि अब भी खाद्य आपूर्ति विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी इस दावे को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर रहे हैं, जिससे यह बात तो स्पष्ट होती नजर आ रही है कि जिला कलेक्टर को विभागीय अधिकारी जांच दल के नाम पर की गई लीपापौती दिखाकर भ्रमित करने का काम रहे हैं।

  

सोसायटियों से वितरित किया जा रहा सड़ा गेहूं
उल्लेखनीय है कि खाद्य आपूर्ति और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से भदौनी स्थित भागीरथ वेयर हाउस में रखे सड़े हुए गेहूं को अच्छे गेहूं में मिलाकर शाजापुर पीडीएस की उचित मूल्य की दुकानों पर पहुंचाया जा रहा था। विभागीय अधिकारियों की इसी मनमानी को मीडियाकर्मियों द्वारा प्रमुखता से उजागर किया गया। मामले के प्रकाश में आते ही जिला कलेक्टर दिनेश जैन ने टीम गठित कर जांच के आदेश दिए। गठित दल वेयर हाउस पहुंचा जहां अधिकारियों ने वेयर हाउस संचालक से मैत्री निभाते हुए जांच में किसी भी तरह का सड़ा हुआ गेहूं नही होने रिपोर्ट तैयार कर दी, और इस पूरे मामले में परिवहनकर्ता के प्रतिनिधि पर कार्रवाई करते हुए उसे काम से हटा दिया गया। इसीके साथ अपनी मनमानी को छिपाने के लिए अधिकारियों ने सड़े हुए गेहूं की बात को मिथ्या बताते हुए उसका खंडन जारी कर दिया। खंडन जारी होने के बाद मीडियाकर्मियों ने सोसायटियों से बांटे जा रहे गेहूं की गुणवत्ता का जायजा लिया जिसके चलते निपानिया डाबी, रिछौदा सहित अन्य सोसायटियों से सड़ा हुआ गेहूं वितरित किया जाना सामने आया। इस बात से स्पष्ट होता है कि जिला कलेक्टर को विभागीय अधिकारी गुमराह करने के उद्देश्य से भ्रामक रिपोर्ट सौंपकर मामले में लीपापौती कर रहे हैं। वहीं सवाल यह भी है कि यदि वेयर हाउस से सड़े हुए गेहूं का परिवहन नही किया गया होता तो सोसायटियों में सड़ा हुआ गेहूं कहां से आया? हालांकि अब भी अधिकारी सड़े हुए गेहूं की बात से इनकार कर रहे हैं।

हाथों से गेहूं छांट रहे उपभोक्ता
भागीरथ वेयर हाउस से सोसायटियों तक पहुंचाए गए गेहूं में सड़ा हुआ गेहूं भी शामिल है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस बात को मानने को तैयार नही हैं। अधिकारियों का कहना है कि गेहूं सोसायटियों में ही खराब हुआ होगा। हालांकि एक कर्मचारी ने नाम नही छापने की शर्त पर बताया कि विभागीय अधिकारियों का दबाव है कि यही गेहूं बेचा जाए और इस बारे में किसी से भी कुछ नही कहा जाए। वहीं अधिकारियों की इस मनमानी का पता लगने पर सोसायटियों पर पहुंच रहे उपभोक्ताओं ने गेहूं को छांटकर लेना शुरू कर दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सोसायटी में रखा अधिकांश गेहूं सड़ा हुआ है, जिसके चलते वह पहले गेहूं देख रहे हैं और इसके बाद अच्छे गेहूं को खरीद रहे हैं।

इनका कहना है
वेयर से सड़ा हुआ गेहूं नही मिला है। वहीं जो गेहूं सोसायटियों में सड़ा हुआ दिख रहा है वह बारिश के कारण खराब हुआ होगा। सड़े गेहूं को नही बांटने दिया जाएगा।
-एचएल सुमन, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी शाजापुर।