जानिए… हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है नीम जामुन और पीपल की दातून

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आज भी कई जगहों पर आयुर्वेदिक तरीकों से दांतों की सफाई की जाती है।

अपनी ओरल हेल्थ को बनाएं रखने के लिए दिन में कम से कम दो बार अपने दांतों को ब्रश करना और जीभ की सफाई करना चाहिए। वहीं, आयुर्वेद में भी मुंह को साफ रखने के लिए हर रोज दांतों की सफाई करने के महत्व भी बताया गया है, जिससे कि दांत सफेद और चमकदार बने रहें। प्राचीन समय में, लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए विशिष्ट पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे और आज भी कई जगहों पर आयुर्वेदिक तरीकों से दांतों की सफाई की जाती है। आयुर्वेदिक तरीकों और ब्रश करने की आधुनिक तरीकों का उपयोग करने वाले लोगों की ओरल हेल्थ के बीच एक बड़ा अंतर है। जैसे, आयुर्वेदिक पद्धति का उपयोग करने वाले लोगों में दांतों की सड़न की समस्या से पीड़ित होने की सम्भावना कम होती है।

ऐसे रखें दांतों को स्वस्थ
प्राचीन समय में लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए कड़वे पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे, जिसे दातून के नाम से जाना जाता है। कड़वे पौधों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। साथ ही तीखे स्वाद वाली जड़ी-बूटियाँ मुंह से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती हैं और सांसों की बदबू से भी लड़ती हैं। नीम, आम, और पीपल के पेड़ की टहनियाँ मुंह को साफ रखने में कारगर है।आजकल बाजार में विभिन्न प्रकार के टूथपेस्ट उपलब्ध हैं, जो आयुर्वेद के अनुसार इस्तेमाल किए गए पौधों के समान हैं। आप हर्बल टूथपेस्ट का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि वे हर्बल पौधों से बने होते हैं और रासायन-मुक्त होते हैं। वे रासायनिक रूप से भरी हुई फैंसी टूथपेस्ट से कहीं बेहतर हैं।

दांतों को दो मिनट तक करें साफ
विज्ञान के अनुसार, आपको अपने दांतों को कम से कम दो मिनट तक अच्छी तरह से ब्रश करना चाहिए। अपने मुंह के हर कोनों कवर करने के लिए छोटे और कोमल स्ट्रोक का उपयोग करें। आयुर्वेद आपके दांतों को ब्रश करने के तुरंत बाद जीभ को स्क्रैप करने की सलाह देता है। स्क्रैपिंग ओरल हाइजीन को कम्पलीट करता है। यह जीभ से गंदगी या बिल्ड-अप को हटाने में मदद करता है, जिसकी वजह से मुंह से बदबू आती है, इसलिए अगर आपके मुंह से कभी भी बदबू आए, तो समझ लें कि आप अपनी जीभ को सही तरह से साफ नहीं कर रहे हैं।