GAD के जवाब से सरकारी घोषणा से लगी आस टूटी
छिंदवाड़ा
कोरोना संक्रमण के दौरान जान की परवाह किए बगैर ड्यूटी करते हुए शहीद होने वाले कर्मचारियों अधिकारियों के परिजनों को नौकरी देने के फैसले से अब सरकार ने किनारा कर लिया है। छिंदवाड़ा जिले के उप अधीक्षक जेल राजकुमार त्रिपाठी की कोरोना से हुई मौत के मामले में यह बात सामने आई है। जीएडी ने जेल विभाग की ओर से शहीद त्रिपाठी के बेटे को अनुकम्पा नियुक्ति देने संबंधी प्रस्ताव लौटा दिया है।
जेल अधीक्षक छिंदवाड़ा ने 17 सितम्बर 2020 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को डीजी जेल और सुधारात्मक सेवाएं के माध्यम से पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि छिंदवाड़ा जिला जेल में पदस्थ उप अधीक्षक जेल राजकुमार त्रिपाठी 6 फरवरी 2017 से जेल में पदस्थ थे। उन्होंने बिना किसी अवकाश लिए कोरोना संक्रमण काल में 22 मार्च 2020 से 9 सितम्बर तक अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। वे लगातार बंदियों के संपर्क में आते रहे। इस बीच कोरोना पाजिटिव कैदियों के संपर्क में आ जाने से वे कोरोना संक्रमित हो गए। 9 सितम्बर को कोरोना संक्रमित बंदी की रिहाई के दौरान उसके संपर्क में आने के बाद वे कोरोना पाजिटिव हुए थे। इसके बाद वे जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती हुए और उपचार के दौरान 14 सितम्बर 2020 को उनकी मृत्यु हो गई।
जेल अधीक्षक की ओर से लिखे पत्र में कहा गया है कि राजकुमार त्रिपाठी की पत्नी प्रीति त्रिपाठी ने बेटे जन्मेजय त्रिपाठी को सहायक अधीक्षक जेल के पद पर पदस्थ करने के लिए आवेदन दिया गया है। गृह व जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने भी राजकुमार त्रिपाठी के बेटे को अनुकम्पा नियुक्ति देने की घोषणा भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में की थी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना के दौरान ड्यूटी करते हुए शहीद होने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के परिजनों को 50 लाख रुपए की सम्मान निधि और जिस पद पर ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अधिकारी शहीद हुआ है, उससे एक पद नीचे वाले कैडर में अनुकम्पा नियुक्ति देने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के मद्देनजर कई कोरोना योद्धाओं को परिजनों को नौकरी भी मिली लेकिन राजकुमार त्रिपाठी के बेटे की नियुक्ति के मामले में सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी सामान्य प्रशासन विभाग ने नौकरी देने से इनकार कर प्रस्ताव लौटा दिया है।
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