प्लेन क्रेश के बाद भी चर्चित हो रही माहुर खुदरा की पहाडी

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पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित कर रहा लोडामा का झरना

rafi ahmad ansari
बालाघाट। वन विभाग के दक्षिण सामान्य वनमंडल के पूर्व लांजी वन परिक्षेत्र सामान्य के मुंडीदादर बीट में लोडामा का झरना पर्यटको को अपनी ओर आकृर्षित कर रहा है। लोडामा गांव के करीब आधा किलोमीटर दूर घने जंगलो से होते हुए लोडामा झरना माहुर खुदरा की पत्थरीली पहाडियों से टकराकर बह रहा है। बहने झरने के नैसर्गिक सौंदर्य को निहारने के लिये प्रतिदिन कोई ना कोई वहां पर आता है। किंतु घने जंगलो और पहाडियो के बीच होने से आवागमन ना होने से आने जाने में दिक्कते हो रही है। पिछले दिनो हमारे प्रतिनिधि के द्वारा मुख्य मार्ग से आधा किलोमीटर घने जंगलो से होकर जब उक्त झरने तक पहुचकर देखा गया तो वंहा पर छत्तिसगढ के राजनांदगांव, महाराष्ट्र के अांमगांव और लांजी के कुछ पर्यटक उक्त झरने का आंनन्द ले रहे थे। रिजर्व फारेंस्ट होने से लोगो को जाने में दिक्कतें हो रही है। वंहा पर उपस्थित लोगो ने बताया कि यदि आने जाने के लिये रास्ता बना दिया जाये तो उक्त प्राकृतिक सौेंदर्य को देखने के लिये दूर दराज से लोग आयेगे। किंतु रिजर्व फारेस्ट होने से यह आसान नही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र भी है, झरने वाली पहाडी के उस पार छत्तिसगढ आता है। वहां पर यदि ईको टुरिज्म के माध्यम से पर्यटको के लिये कुछ सौहलियते उपलब्ध करा दी जाती है तो भविष्य में उक्त नैसर्गिक दृश्य को देखने के लिये लोग दुर दराज से भी आयेगें। वन विभाग के जिम्मेंदारो के द्वारा यदि इको टूरिज्म के माध्यम से उक्त झरने को सवांरने का प्रयास किया जाता है तो ऐसा संभव हो सकता है लेकिन यह जिम्मेंदारो की दिलचस्पी पर ही निर्भर होगा।

इनका कहना है- लोडामा झरना मुंडीदादर बीट में आता है,जो रिजर्व फारेस्ट है। इको टुरिस्ट के जरियें उस क्षेत्र का विकास किया जा सकता है किंतु वन सरंक्षण के नियमो से गुजरना पडेगा।

शिशुपाल अहिरवार,वन परिक्षेत्र अधिकारी
पूर्व लांजी सामान्य