शिवराज को घर में घेरने की कांग्रेस का प्लान

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सीहोर , 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने इस बार बीजेपी के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घेराबंदी कर दी है. पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को मैदान में उतारा है. चुनाव में शिवराज को उनके घर में कैद करने की कांग्रेस की रणनीति है.

बीजेपी इस बार भी शिवराज के चेहरे के भरोसे ही चुनाव मैदान में उतरी है. प्रत्याशियों की पहली डिमांड शिवराज हैं, लेकिन कांग्रेस इस बार बीजेपी या शिवराज को वॉकओवर देने के मूड में नहीं है. उसने शिवराज को उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में क़ैद करने की रणनीति बनाई है और इस बार कमलनाथ नहीं बल्कि राहुल गांधी का फॉर्मूला अपनाया गया है.

कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग में दखल रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को शिवराज के मुकाबले उतार दिया है. कांग्रेस की रणनीति है कि अरुण यादव के बहाने शिवराज को बुधनी में उलझाए रखा जाए. कांग्रेस शिवराज के उस कॉफिडेंस को भी चुनौती देना चाहती थी, जिसमें उन्होंने नॉमिनेशन फाइल करने के बाद कहा था कि अब मैं इस क्षेत्र में नहीं आऊंगा, सारा फैसला बुधनी की जनता पर छोड़ दिया है.

अरुण यादव को बुधनी से उतारने के पीछे कांग्रेस की रणनीति पर नज़र डालें तो यह बात महत्वपूर्ण है कि अरुण यादव ओबीसी वर्ग के बड़े चेहरे हैं. प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के नाते पार्टी संगठन में भी पकड़ है. बुधनी में सवा दो लाख वोटर में 22 हजार यादव वोट हैं. इसके अलावा विधान सभा क्षेत्र में गुर्जर, कुर्मी, अहिरवार और अन्य वोटर हैं.

कांग्रेस पार्टी जाति और स्थानीय मुद्दों के सहारे सीएम शिवराज को घेर सकती है. हालांकि बीजेपी मान रही है कि विपक्ष के टारगेट पर भले ही सीएम शिवराज की सीट हो, लेकिन जीत बीजेपी की ही होगी.

बहरहाल भोपाल से सटा सीहोर का बुधनी विधानसभा क्षेत्र सीएम शिवराज और अरुण यादव के मुकाबले के कारण हाईप्रोफाइल सीट में तब्दील हो गया है. सवाल यह है कि क्या बुधनी के जरिए प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर बीजेपी का प्रभाव कम करने की कांग्रेस की रणनीति कारगर होगी या कांग्रेस की रणनीति पर शिवराज फैक्टर भारी पड़ जाएगा.

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