संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव" पुस्तक का लोकार्पण समारोह

संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव" पुस्तक का लोकार्पण समारोह

राष्ट्र केवल भूभाग नहीं है, यह जीवन की सांस्कृतिक दृष्टि: विधानसभा अध्यक्ष

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की संस्कृति और परम्पराओं से जुड़ी है। इसके जरिए ही भारत के वास्तविक इतिहास से नई पीढ़ी को जानकारी मिल रही है। उन्होंने विनोबा भावे की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद सबसे पहले देश की शिक्षा पद्धति बदली जानी चाहिए थी। यह काम हुआ नहीं, पर नई शिक्षा नीति से इस दिशा में ऐतिहासिक पहल हुई है। यह हमारी संस्कृति और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाली है। 

बागडे बुधवार को पाथेय भवन में “संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव” पुस्तक लोकार्पण समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ देश के श्रेष्ठ नागरिक बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि बाल और किशोर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आत्मा है। जो एक बार इससे जुड़ जाता है वह सदा राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि देश का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां के विकास के लिए संघ के कार्यकर्ता काम नहीं करते।  संघ की 1925 में स्थापना के बाद नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्र के लिए किए कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संघ जीवन से जुड़ी उदात्त दृष्टि देने वाला संगठन है।

बागडे ने कहा कि देश की आजादी के बाद 26 जनवरी को पंडित नेहरू के आग्रह पर आरएसएस के स्वयंसेवकों ने राजपथ पर पूरे अनुशासन के साथ मार्च किया था।  उन्होंने संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर उसके किए महत्वपूर्ण कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि इस संगठन के लोगों की तपस्या से राष्ट्र विकास की पथ पर आगे बढ़ा है। 

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राष्ट्र केवल भूभाग नहीं है। यह जीवन की सांस्कृतिक दृष्टि है। उन्होंने कहा कि संघ के सौ वर्षों की यात्रा के दौरान संगठित चरित्रवान लोग निरंतर तैयार हुए हैं। 
देवनानी ने कहा कि संघ जन निर्माण का कार्य करते हुए राष्ट्र प्रथम की सोच से कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवक संगठन कोई है तो वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है। उन्होंने संघ द्वारा सेवा बस्तियों द्वारा और सामाजिक समरसता के लिए किए कार्यों  की महत्वपूर्ण बताते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव वाद से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

अति विशिष्ट अतिथि संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने "देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें" की भावना को जन जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि संघ ने व्यक्ति निर्माण के कार्य के अंतर्गत देश को उन्नति, प्रगति के मार्ग पर ले जाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि साथ साथ चलने के विचार से ही संघ ने सौ साल की यात्रा तय की है। उन्होंने कहा कि सभी यह संकल्प ले कि मैं रहूं न रहूं देश रहना चाहिए।

अति विशिष्ट अतिथि पंडित राजकुमार शर्मा ने कहा कि विज्ञान सम्मत संस्कृति है। पाखंडों से,अंधविश्वासों से मुक्त करने के साथ ही अपने आप से प्रेम और राष्ट्र से प्रेम करना सिखाए, उस धर्म को अपनाने की जरूरत है। यही सनातन धर्म और संस्कृति है। राज्यपाल बागडे ने पूर्व में पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि इससे संघ को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।