महिलाओं को आर्थिक संबल देने के लिये शिवराज सरकार की क्रांतिकारी पहल

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 भोपाल

देश की कुल आबादी का 75 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है, जिनका प्रमुख आधार खेती रहा है। प्रारंभ से ही ग्रामीण महिलायें खेती कार्य में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर कार्य करती रहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिला शक्ति को पहचान कर मध्यप्रदेश सरकार ने उनके आर्थिक एवं सामाजिक विकास की अवधारणा को मूर्त रूप दिया है। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं द्वारा छोटी-छोटी बचत और घर पर बनाई गई वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिये क्रांतिकारी पहल मध्यप्रदेश में हुई है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिये व्यापक स्तर पर महिलाओं को मदद का सिलसिला शुरू किया गया है, जिससे वे अपने हुनर को बढ़ाकर अपनी आय का स्थाई जरिया कायम कर सकें।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिये प्रभावी कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना को मूर्तरूप देने के लिये "बूस्टर डोज" के रूप में राज्य शासन द्वारा इस वर्ष महिला स्व-सहायता समूहों को बैंकों के माध्यम से दी जाने वाली सहायता सीमा 300 करोड़ से बढ़ाकर 1400 करोड़ रूपये कर दी गई है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि बैंक ब्याज दर चार प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगी। इसके ऊपर का ब्याज राज्य सरकार देगी। सम्पूर्ण प्रदेश के महिला स्व-सहायता समूहों की 33 लाख महिलाओं को स्व-रोजगार की दिशा में बढ़ावा देने के लिये की गई इस नवीन व्यवस्था से प्रदेश की महिलाएं सशक्त होंगी। सशक्त महिलाएँ ही प्रदेश को सशक्त बना सकती है। उन्हें आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर करने और स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों और विपणन के लिये स्व-सहायता पोर्टल भी तैयार किया गया है।

प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान बेटियों और महिलाओं के प्रति अति संवेदनशील है। उनका मानना है कि भारतीय परंपरा में बहन-बेटी का सम्मान सर्वोपरि है, अत: बहन-बेटियों को समाज में बराबरी का स्थान मिले इसके लिये राज्य सरकार हर पहलू पर कार्य कर रही हैं। प्रदेश की महिलाओं ने कोरोना काल में यह सिद्ध करके दिखा दिया कि वे हर विपदा से बचाने में सक्षम है। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा बनाये गये मास्क और पीपीई किट ने आम लोगों और सरकार की बहुत सहायता की। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये तैयार की गई सामग्री काफी उपयोगी साबित हुई।

मध्यप्रदेश के कई ग्रामीण अंचलों में संचालित महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा अनेक ऐसे उत्पाद तैयार किये जा रहे है, जो न केवल उनके क्षेत्र में अपितु प्रदेश एवं अन्य राज्यों में भी पहचाने जा रहे है। गाँव के इस हुनर को आगे बढ़ाने के लिये प्रदेश सरकार प्रोत्साहन के साथ-साथ उन्हें आर्थिक मदद भी उपलब्ध करवा रही है। राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि अब सरकारी खरीदी में स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रदेश में अब महिला स्व-सहायता समूहों को आंगनवाड़ी केन्द्रों में वितरित होने वाले रेडी-टू-ईट पोषण आहार और शाला स्तर पर गणवेश निर्माण का कार्य दिया जा रहा है। इन कार्यों में स्व-सहायता समूहों को पूर्ण स्वायत्तता रहेगी। इससे प्रदेश में "लोकल को वोकल" बनाने का सिद्धान्त सार्थक होगा।

स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये उन्हें उत्पादन, पैकेजिंग, मार्केटिंग में विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को व्यवस्थित करने के लिये राज्य स्तर पर संस्थान बनाया जाएगा। समूहों के उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिये "ऑनलाइन ट्रेडिंग" तथा "ई-प्लेटफार्म" उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की जा रही है। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश में 43 हजार से अधिक ग्रामों में 3 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों का गठन किया गया है, इन समूहों से 33 लाख 96 हजार परिवार जुड़ चुके है। समूहों को रोजगार की विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रदेश के 11 लाख 54 हजार से अधिक परिवारों को कृषि व पशुपालन गतिविधियों से जोड़ा गया है। तीन लाख 69 हजार से अधिक परिवारों को शूक्ष्म गतिविधियों से जोड़ा गया है। निर्धन परिवारों को योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई न हो इसके लिए सरकार द्वारा हितग्राहीमूलक योजनाओं को अधिक व्यवहारिक, सरल व पारदर्शी बनाया जा रहा है।

सशक्त एवं आर्थिक रूप से समृद्ध महिला स्व-सहायता समूह नए "आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" के सपने को साकार करेंगे।