महागठबंधन ने सभी 243 सीटों की सूची जारी की, कांग्रेस का अगड़ों व राजद का पिछड़ों पर दांव

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पटना 
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उतरे दोनों बड़े गठबंधनों ने टिकट बंटवारे में सामजिक समीकरण साधने के लिए एक ही फॉर्मूला अपनाया है। भाजपा और कांग्रेस ने सवर्णों पर भरोसा किया है तो जदयू और राजद ने पिछड़ों और अतिपिछड़ों पर अपना दांव लगाया है। कांग्रेस ने तो अपने खाते की लगभग आधी सीटें सवर्णों के हवाले कर दी है। महागठबंधन ने सभी 243 सीटों की सूची गुरुवार को यहां एक होटल में आयोजित साझी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी कर दी। इसमें राजद और कांग्रेस के साथ ही तीनों वाम दलों के उम्मीदवारों के भी नाम हैं। राजद- कांग्रेस ने लगभग दो दर्जन महिलाओं को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस ने नये लड़ाकों पर भी बाजी लगाई है लेकिन, राजद ने मंजे खिलाड़ियों का ही अपना उम्मीदवार बनाया है। कांगेस में लगभग एक दर्जन से अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। दलित और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में दोनों दलों की भागीदारी लगभग बराबर है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में महागठबंधन के नेताओं में राजद से जगदानंद सिंह और सांसद मनोज झा, कांग्रेस से डॉ मदन मोहन झा, डॉ अखिलेश सिंह, भाकपा से रामबाबू कुंवर, माकपा से अरुण कुमार मिश्रा, भाकपा माले के केडी यादव मौजूद थे।

राजद का सबसे अधिक आधार वोट पर ध्यान
महागठबंधन में वाम दलों की सीटों को छोड दें तो राजद ने सबसे अधिक अपने आधार वोट पर ध्यान दिया है। ‘माई’ समीकरण पर पार्टी का विशेष जोर रहा है। सर्वाधिक 58 यादव प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। अल्पसंख्यकों को 15 टिकट दिये गये हैं। राजद की सूची में सवर्णों के हिस्से महज दर्जनभर सीटें आई हैं। वहीं, अति पिछड़ों को भी राजद ने खासी तरजीह दी है। इस समाज के हिस्से में राजद की 24 सीटें गई हैं। यादव के अलावा पिछड़ों में शामिल कुशवाहा समाज को आठ सीटें दी गई हैं। सात वैश्यों को भी लालटेन थमाई गई है। दलितों में चार पासवान, दो मुसहर, दो आदिवासी, सात रविदास को टिकट देकर पार्टी ने दलित-महादलित को साधने की कोशिश की है।

कांग्रेस ने 70 में सबसे अधिक 32 सीटों पर सवर्ण उतारे
कांग्रेस ने अपने हिस्से की 70 सीटों में सबसे अधिक 32 सीटों से सवर्ण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। दस अल्संख्यकों पर भी पार्टी ने बाजी लगाई तो दलित उम्मीदवारों की संख्या भी दस है। इस पार्टी ने युवाओं पर काफी ध्यान दिया है। इसके सिटिंग उम्मीदवारों  छोड़ दें तो 20 प्रत्याशियों की ऊम्र लगभग 40 से 45 वर्ष के बीच है। दोनों दलों ने मिलकर 24 महिलाओं को मैदान में उतारा है। इसके अलावा कांग्रेस में अति पिछड़ा उम्मीदवारों की संख्या भी आठ है। 

बाल्मीकीनगर से प्रवेश उम्मीदवार
कांग्रेस ने बाल्मीकीनगर संसदीय क्षेत्र से प्रवेश कुमार मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है। महागठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई। बाल्मिकीनगर से आम चुनाव में भी कांग्रेस के उम्मीदवार ही चुनाव लड़े थे। लेकिन उस समय जदयू के वैद्यनाथ महतो से बाजी हार गये थे। श्री महतो के निधन के बाद सीट खाली हो गई। अब उप चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के पास गई है।

कांग्रेस ने भावना, लव और सुभाषिनी को टिकट, फौजिया वंचित
महागठबंधन ने अपने बड़े नेताओं को तो तरजीह दी ही है, बाहर से आने वाले बड़ नाम पर भी भरोसा किया है। हालांकि इस मामले में कांग्रेस मुनव्वर राणा की पुत्री फौजिया रणा को एडजस्ट नहीं कर सकी। कांग्रेस ने शत्रुघ्न   सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा और शरद यादव की पुत्री सुभाषिनी को मैदान में उतारा है। लेकिन, हाल में पार्टी ज्वायन करने वाली फौजिया राणा को टिकट नहीं दे सकी। उधर, लोकसभा चुनाव में शकील अहमद के साथ पार्टी से निकाली गई भावना झा को कांग्रेस ने फिर से टिकट दे दिया है। 

दो के क्षेत्र बदले
हालांकि कांग्रेस ने सिटिंग सभी विधायकों को पार्टी ने अपने पुराने क्षेत्र से ही टिकट दिया है। केवल डा. अशोक कुमार रोसड़ा की जगह कुशेश्वरस्थान और विजय शंकर दुबे को मांझी की जगह महराजगंज से उम्मीदवार बनाया है।

युवा संगठन को तरजीह
पार्टी ने युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे दो नेताओं को टिकट दे दिया है लेकिन एक को वंचित कर दिया। युवा कांग्रेस के अध्यक्ष ललन यादव को सुल्तानगंज और वर्तमान अध्यक्ष गुजन पटेल को नालंदा से मैदान में उतारा है। लेकिन, पिछली बार बांकीपुर से चुनाव लड़े संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे कुमार आशीष की सीट बांकीपुर इस बार शत्रुघ्न   सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा के खाते में चली गई।

कई नेताओं की दूसरी पीढ़ी मैदान में
कांग्रेस ने अपने पुराने नेताओं की दूसरी पीढ़ी का भी ख्याल रखा है। कहलगांव से पार्टी ने इस बार सदानंद सिंह की जगह उनके पुत्र शुभानंद मुकेश उतारा है। इसी तरह वजीरगंज से भी अवधेश सिंह के पुत्र डा. शशि शेखर सिंह को भी मैदान में उतारा है। पार्टी के कद्दावर नेता रहे स्व. दिलकेश्वर राम के पुत्र राजेश राम भी मैदान में उतरे हैं। हालांकि इसके पहले भी वह वहां से विधायक रहे हैं। जदयू से आये रवि ज्योति कुमार को पार्टी ने राजगीर से उम्मीदवार बनाया है। वह राजगीर से ही जदयू के विधायक भी रहे हैं।