मन की बात जब-जब आती है महिलाओं को लगता है कि प्रधानमंत्री महगांई से थोड़ी बहुत निजात दिलायेंगे – वंदना

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रायपुर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात की 68 वी कड़ी में अपने विचार व्यक्त किए, एक बार भी बढ़ती हुईं महगांई के मुद्दे का जिक्र भी नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते आर्थिक बदहाली से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं पर महगांई की मार बढ़ती जा रही हैं। देश में बढ़ती महगांई को रोकने में केंद्र सरकार पूरी तरह से विफल रही हैं। मोदी जी ने 6 साल पहले से दस मिनट के भाषण में कितनी बार महगांई को कम करने की बात की है। जब से मोदी जी के हाथों में जनता ने केन्द्र की चाबी सौंपी है तब से महगांई बेलगाम होती चली जा रही हैं डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जनता के जेब पर डाका डाला है। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों का असर आवश्यक दैनिक वस्तुओ पर पड़ा है। आज महगांई आसमान छू रही है। क्यो मोदी को मालूम नहीं है क्या? डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के कारण परिवहन का किराया बढ़ेगा, जिसके कारण हर एक वस्तु महंगी हो जायेगी। बेलगाम महगांई चिंताजनक है लेकिन प्रधानमंत्री ने ना कभी इस पर चिन्ता की और ना बढ़ती हुये महगांई को रोकने आवश्यक कदम उठाए।

राजपूत ने कहा कि मोदी जी के मन की बात का आयोजन जब-जब होता है तब-तब महिलाओं को लगता है कि अब शायद मोदी जी महगांई के मुद्दे पर चर्चा करके महगांई से थोड़ा बहुत निजात दिलाएंगे लेकिन हर बार महिलाओं के हाथ निराशा लगती है। बढ़ती महगांई के कारण रसोई का बजट बिगड़ गया है। बेशक भारत की जनता बहुत सहनशील और भावनात्मक है लेकिन 80-90 रुपए लीटर के भाव का डीजल- पेट्रोल बेचकर कब तक मोदी जी जनता के भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे। प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना काल में लोगों की आमदनी कम हो गई हैं। पहले से ही बेरोजगारी की मार थी। कोरोना काल में जिसके पास रोजगार था वह भी छिन गया। आमदनी चव्वनी और खर्चा रूपया हो गया है, केन्द्र सरकार प्रमुख मुद्दे को छोड़ बाकी सभी विषयों पर बात करती हैं। केन्द्र सरकार अपनी जिममेदारियों से भाग रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले 6 साल में मंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर दी है। मंदी के इस दौर में पहले नरेन्द्र मोदी ने नोट बंदी की और फिर जीएसटी, रही-सही असर कोरोना ने पूरी कर दी। देश की जनता को भी 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर सवाल उठाने का अधिकार है आखिर उसका बड़ा लाभ कौन उठा रहा है। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और उसमें मुखिया की अपनी भूमिका को समझें। छह माह पुराने कोरोना ने आज पूरे भारत में पांव पसार लिया है, मोदी यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाते तो कोरोना के मरीजों की संख्या 35 लाख के पार नहीं होती।