भागलपुर प्रमंडल में बीजेपी के पास महज एक सीट, महागठबंधन ने एनडीए का सफाया कर दिया था  

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नई दिल्ली 
बिहार विधानसभा चुनाव की लड़ाई एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच सिमटती जा रही है. ऐसे में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सत्ता को बरकरार रखने की जद्दोजहद में है. वहीं, तेजस्वी यादव की अगुवाई में महागठबंधन सत्ता में वापसी के लिए बेताब नजर आ रहा है. बिहार के भागलपुर प्रमंडल की बात की जाए तो यहां बीजेपी के पास खोने के लिए कुछ नहीं है जबकि आरजेडी और कांग्रेस के लिए अपनी सीटों को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है. बिहार के भागलपुर प्रमंडल में दो जिले की 12 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें भागलपुर की सात सीटें है तो बांका जिले की पांच सीटें है. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार और लालू यादव ने मिलकर बीजेपी का सफाया कर दिया था. यहां 12 विधानसभा सीटों में से 5 सीटें जेडीयू ने जीती थी जबकि 4 सीटें आरजेडी को मिली थी. वहीं, दो सीटें कांग्रेस को मिली थी और महज एक सीट बीजेपी के खाते में गई थी. मौजूदा बदले हुए समीकरण को देखा जाए तो महागठबंधन और एनडीए यहां पर बराबर की स्थिति में खड़े नजर आ रहे हैं. 

भागलपुर: बीजेपी का खाता नहीं खुला था
भागलपुर जिले में सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें सुल्तानगंज, नाथनगर, गोपालपुर, बिहपुर, पीरपैंती  भागलपुर और कहलगांव विधानसभा सीटें शामिल हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने सुल्तानगंज, नाथनगर और गोपालपुर सीट पर जीत हासिल की थी. वहीं, कांग्रेस ने बिहपुर और पीरपैंती जीती थी जबकि आरजेडी ने भागलपुर और कहलगांव पर जीत का परचम फहराया था. बीजेपी भागलपुर जिले की सात में से एक भी सीट जीत नहीं सकी थी. 

बांका: बीजेपी के पास एक विधायक
भागलपुर प्रमंडल के बांका जिले में पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें बेलहर, कटोरिया, अमरपुर, धोरैया और बांका सीट शामिल है. 2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू दो सीटें जीती थी, जिनमें अमरपुर और धोरैया सीट थी. वहीं, आरजेडी बेलहर, कटोरिया सीटें जीतने में कामयाब रही थी जबकि बीजेपी सिर्फ बांका सीट पर ही कमल खिलाने में कामयाब रही थी. 

बता दें कि इस बार समीकरण बदल गया है. नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए का नेतृत्व कर रहे हैं. हालांकि, अभी एनडीए में कौन सी सीट किस पार्टी को जाएगी यह तय नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि 2010 के फॉर्मूले के तहत यहां जेडीयू और बीजेपी के बीच सीट बंटवारा हो. वहीं, महागठबंधन में भी इसे लेकर खींचतान जारी है कि जेडीयू वाली सीटों पर कौन पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी.