हैदर रज़ा को 99वें जन्मदिन पर दी गई पुष्पांजलि

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हैदर रज़ा को 99वें जन्मदिन पर दी गई पुष्पांजलि

रंगारंग सांस्कृतिक संध्या से हुआ रज़ा उत्सव का समापन

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मंडला – सोमवार को पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित मशहूर चित्रकार मरहूम सैयद हैदर रज़ा के 99वें जन्म दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस मौके पर सुबह स्थानीय बिंझिया स्थित कब्रिस्तान में हैदर रज़ा व उनके पिता सैयद मोहम्मद रज़ी की कब्र पर चादर पेश की गई। रज़ा उत्सव में शामिल सभी कलाकार, रज़ा फाउंडेशन, नमामि आर्ट फॉउण्डेशन व इनर वॉइस के सदस्य व स्थानीय लोगों ने हैदर रज़ा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस मौके पर रज़ा साहब को श्रद्धांजलि देने पहुंचे भाजपा नेता जयदत्त झा ने कहा कि हैदर रजा की 99वीं वर्षगांठ पर रजा फाउंडेशन के साथ सभी स्थानीय लोग व कलाकारों ने मिलकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि रज़ा साहब की स्मृति में जो रज़ा उत्सव आयोजित किया जाता है उसमें लोग और बढ़ चढ़कर हिस्सा लें, अपने बच्चों को उस से जोड़ें। कला के क्षेत्र में भी भविष्य काफी उज्जवल है और इस तरह से भी हम रज़ा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते है। रज़ा साहब ने मंडला जिले का नाम रोशन किया है। मैं सब से कामना करता हूं कि रज़ा फाउंडेशन के कार्यक्रमों से जुड़े और कला और साहित्य के क्षेत्र में उनके कार्यक्रमों को गति दे। अभी मंडला में इन सब कार्यक्रमों में काफी गति आई है।

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रज़ा उत्सव के संयोजक योगेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि रज़ा साहब इस मिट्टी की गंध, यहां के रंग को लेकर पूरा काम करते गए और संघर्ष करते गए। जंगल और ग्रामीण परिवेश में उनका बचपन बीता। इससे उन्होंने आदिवासी कल्चर और संगीत को माध्यम बनाकरअपनी कला को निखारा। वे निरंतर काम करते गए और मिट्टी की ही चीज को लेकर वो आगे बढ़ते गए। वह हमेशा भारतीय संस्कृति के प्रति उनका काफी लगाव रहा। वह हम लोगों से भी कहते थे कि हमारी संस्कृति इतनी समृद्ध है कि हम उस में ही काम करें। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने यहां की मिट्टी की गंध और रंग को ही चित्रित किया और शून्य में ही सारा कुछ ढूंढते थे।

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सैयद हैदर रज़ा के 99वें जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या की मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद श्रीमती संपतिया उइके ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शिरकत की और प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने रज़ा मंडल प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कला के क्षेत्र में कार्य करने और उसे बढ़ावा देने हर संभव सहयोग का विश्वास दिलाया। उन्होंने कलाकारों और रज़ा फाउंडेशन से इसके लिए सुझाव भी लिए ताकि ऐसे कार्यक्रमों को लगातार आयोजित कर स्थानीय प्रतिभाओं को निखारा जा सकें।

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रविवार की शाम रज़ा कला वीथिका में रज़ा उत्सव के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नमामि आर्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष पुनीत नंदा द्वारा हुस्ना नामक नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक में पुनीत नंदा के साथ साथ श्रीधा पाठक, रोहित श्रीवास्तव, अनिमेष पाठक, अनुपम पाठक और अनिरुद्ध मिश्रा ने अपनी सहभागिता दर्ज की। दूसरी प्रस्तुति के रूप में बस्ता नामक नाट्य मंचन के जरिए बच्चों को पढ़ाई के साथ साथ अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस नाटक में संदेश दिया गया कि अभिभावकों को पढ़ाई के साथ साथ बच्चों की रुचि के मुताबिक भी कार्य करने की स्वतंत्रता प्रदान करनी चाहिए। तो वहीँ दूसरी ओर बच्चों को यह संदेश दिया गया कि वह सांस्कृतिक – साहित्यिक गतिविधियों के साथ -साथ अपनी पढ़ाई को भी पूरी अहमियत दें। इस नाटक में दीपांशु, तरुण, प्राची, खुशी, सुरेंद्र, मुरली, यशवीर और निशांत ने अभिनय किया। एकल कथक नृत्य रानू चंद्रौल द्वारा किया गया। इस दौरान सौम्या और रानू चंद्रौल की शिष्याओं द्वारा भी सामूहिक कत्थक प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक संध्या के अंतिम प्रस्तुति के रूप में लक्ष्य और अनुष्का ने शानदार फोल्क डांस प्रस्तुत किया।

wreath-given-to-hyder-raza-on-his-99th-birthdayइस एक दिन पूर्व आयोजित सांस्कृतिक संध्या में विंपी द्वारा पिआनो पर अपनी प्रस्तति दी। अनिमेष पाठक द्वारा शास्त्रीय गायन, अनुपम पाठक ने हारमोनियम और अथर्व पाण्डे ने तबले पर अपनी प्रस्तुति देकर श्रोताओं को काफी प्रभावित किया था। लकी उइके द्वारा हिपहॉप नृत्य और अनुरुद्ध मिश्रा द्वारा बांसुरी की शानदार प्रस्तुति दी गई।सांस्कृतिक संध्या का श्रोताओं ने खूब आंनद लिया। रज़ा उत्सव को सफल बनाने में स्थानीय कलाकारों के साथ – साथ रज़ा फाउंडेशन, नमामि आर्ट फाउंडेशन और इनर वॉइस के सदस्यों का उल्लेखनीय योगदान रहा। इस दौरान रज़ा फाउंडेशन के सदस्य सचिव संजीव चौबे, कार्यक्रम संयोजक योगेंद्र त्रिपाठी, नरेश कछवाहा, हेमन्तिका शुक्ला, कपिल तिवारी, गजेंद्र सोनी, जयदत्त झा, आशीष कछवाहा, मनोज द्धिवेदी, कृष्ण महिपाल यादव, शुभम रैकवार, त्रिलोक सिंधिया, राम कुमार नंदा, कैलाश कछवाहा, दीपमणी खैरवार, प्रवीण सैयाम सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।