उपचुनाव से पहले शिवराज सरकार ने किया थोकबंद तबादला, 90 पुलिस अफसरों का तबादला

0
11

कांग्रेस ने सरकार पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाया

भोपाल, उपचुनाव की तारीखों से पहले एमपी में शिवराज सरकार ने बड़े पैमाने पर पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है। सरकार ने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले 19 एएसपी, 71 डीएसपी और एसडीओपी रैंक के अधिकारियों का तबादला किया है। इसकी सूची जारी हो गई है। सूची सामने आने के बाद कांग्रेस भड़क गई है और सरकार पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाया है।

दरअसल, एमपी में 28 सीटों पर उपचुनाव हैं। चुनाव की तारीखें 29 सितंबर को होंगी। उससे पहले इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले को उपचुनाव से ही जोड़ कर देखा जा रहा है। सभी अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के हैं। इससे पहले सरकार ने कई संभागों के आईजी भी बदले हैं। इंदौर आईजी विवेक शर्मा का तबादला भी कुछ दिन पहले ही हुआ है।

कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि पहले तो बीजेपी ने प्रदेश में लोकतंत्र और संविधान के साथ छेड़छाड़ कर, संवैधानिक मूल्यों की हत्या की, एक जनादेश प्राप्त लोकप्रिय सरकार को बीच में गिराया और अब प्रदेश में होने वाले आगामी उपचुनावों को देखते हुए उसे हार का भय सता रहा है। जनता के मूड को बीजेपी भांप चुकी है, इसलिए शिवराज सरकार उपचुनावों की घोषणा के पूर्व ताबड़तोड़ तबादले कर रही है। अपने चहेतों अफसरों की उपचुनाव वाले क्षेत्रों में पोस्टिंग कर वो चुनाव जीतना चाहते हैं।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि इस कोरोना महामारी में भी क्या कारण है कि इतने थोक बंद तबादले शिवराज सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस चालू होने वाली थी, जिसमें प्रदेश के उपचुनाव की घोषणा होना संभावित थी। उसके कुछ मिनट पूर्व ही ताबड़तोड़ इतनी बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के तबादले बता रहे हैं कि शिवराज सरकार को जनमत पर भरोसा नहीं है। वह अधिकारियों के भरोसे पिछले दरवाजे से चुनाव जीतना चाहती है।

उनकी इस मंशा को उन्हीं की मंत्री इमरती देवी कुछ दिन पूर्व ही जगज़ाहिर चुकी हैं कि सत्ता सरकार जिस कलेक्टर को कहेगी, वह हमें चुनाव जितवा देंगे। वैसे भी शिवराज सरकार के बारे में खुद भाजपाई ही कहते हैं कि अधिकारियों के भरोसे चलने वाली सरकार है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में चुप नहीं बैठेगी। इसे लेकर चुनाव आयोग और न्यायालय तक का दरवाजा कांग्रेस खटखटाएगी। आगामी उपचुनावों को देखते हुए तत्काल स्थानांतरण पर रोक लगाई जाए।