संगम वेयरहाऊस एवं 14 राईस मिल सील

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संगम वेयरहाऊस एवं 14 राईस मिल सील

केंद्रीय जांच रिपोर्ट में अमानक स्तर का चावल पाए जाने पर हुई कार्यवाही

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Syed Javed Ali
मण्डला – गुरुवार को गोदाम में भण्डारित चावल एफएक्यू (मानक स्तर) का नहीं पाए जाने पर संगम वेयरहाऊस को सील कर दिया गया है। इसी प्रकार राईस मिलों द्वारा मिलिंग के उपरांत एफएक्यू (मानक स्तर) का चावल जमा न कर सीएमआर हेतु किए गए अनुबंध का उल्लंघन करने पर 14 राईस मिलों को सील कर दिया गया है। इस संबंध में कलेक्टर हर्षिका सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संगम वेयरहाऊस में पाई गई अनियमितताओं की सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच कराई जाकर प्रतिवेदन समुचित कार्यवाही हेतु शासन को भेजा गया है। साथ ही प्रकरण की विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक मंडला को पत्र लिखा गया है।

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उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के जांच दल ने मण्डला में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जा रहे चावल को अमानक स्तर का बताया है। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में इसे इंसानों के खाने लायक भी नहीं पाया। दरसल 30 जुलाई को केंद्रीय जांच दल ने मंडला – बालाघाट में सैंपलिंग की थी। इसमें बालाघाट के साथ – साथ मंडला जिले के भी एक वेयर हाउस का सैंपल फ़ैल हो गया। इसकी जानकारी तब लगी जब भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग मंत्रालय नई दिल्ली ने प्रमुख सचिव, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्य प्रदेश को पत्र लिखाकर इसकी जानकारी दी। इस पत्र के सार्वजनिक होते ही हड़कंप मच गया और विभाग बचाव की मुद्रा में आ गया। केंद्रीय जाँच दल ने यहाँ के चावल को इंसानों के उपयोग लायक ही नहीं पाया। इसका खुलासा तब हुआ जब तब लगी जब भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग मंत्रालय नई दिल्ली ने मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को इस सम्बन्ध में पत्र लिखा। पत्र जारी होते ही बुधवार को प्रदेश सरकार ने जबलपुर से जांच दल को सैंपलिंग लेने तत्काल मंडला भेज दिया। अब विभाग डेमेज कंट्रोल की कवायद में जुट गया है।

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मंडला जिले के नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर हर साल केंद्रीय जांच दल चावल का इंस्पेक्शन करने आती थी। इस बार 2 सदस्यीय टीम बालाघाट जिले के केंद्रों का इंस्पेक्शन करने के बाद मंडला के गोदामों का इंस्पेक्शन किया था। मंडला में संगम वेयरहाउस, कटंगी में सर्वाधिक स्टॉक था। वहां का उन्होंने इंस्पेक्शन किया। उन्हें लगा कि यहां की क्वालिटी कुछ काम है। इस वजह से उसका सेंपल लिया गया। इस सैंपल का दिल्ली के लैब में जांच कराई गई। वहां सैंपल अमानक स्तर का का बताया गया। रिपोर्ट में इसे मानव के उपयोग लायक नहीं माना गया। हमारे यहां 12 लाख क्विंटल धान खरीदी गई थी। धान खरीदने के बाद उसकी मिलिंग कराई गई। मिलर्स से जो चावल मिलता है उसे 70 प्रतिशत ओपन कैब में रखा जाता है। 30 प्रतिशत चावल ही कवर्ड या गोदामों में रखा जाता है। इस बार करीब 8 लाख क्विंटल चावल बनाया गया। जांच के दिन 28 हज़ार मैट्रिक टन चावल गोदाम में था। यहाँ से जो सैंपल लिया गया वो उनके तकनीकी लैब में फ़ैल पाया गया भौतिक रूप से देखने में इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। यही चावल 8 – 10 जिलों में भी वितरित किया गया लेकिन कोई शिकायत नहीं मिली। विभिन्न जांचों दलों की जाँच में भी कोई शिकायत नहीं आई। चूंकि केमिकल लैब में जाँच हुई है उसमे यह फ़ैल पाया गया। इसके बाद प्रदेश शासन द्वारा भारतीय खाद्य निगम के अधिकारीयों / कर्मचारियों की टीम बनाकर प्रदेश के सभी प्रदेश के सभी जिलों में चावल की सैंपलिंग कराई जा रही है। इसके जाँच संभागीय लैब में होगी।