बाढ का प्रकोप: सडक से लेकर घरो के कीचन तक कापन मिट्टी का जमावडा

0
2

बाढ का प्रकोप छटने के बाद सामने आ रही बर्बादी की तस्वीरे

वेयर हाउस मे भंडारित करोडो का चना,गेहू भी हुआ बर्बाद

rafi ahmad ansari
बालाघाट। एक क्षण ऐसा था कि पिछले दिनो हुई भारी बारिश और सिवनी के भीमगंढ बांध से पानी छोडे जाने के बाद आसमानी उंचाई से चारो ओर पानी ही पानी नजर आ रहा था। आफत की इस बाढ ने कई लोगो के आशियाने उजाड दिये है। जहां बाढ का पानी छटते ही अब बर्बादी की तस्वीरे भी सामने आने लगी है। इस बाढ ने किसी का आशियाना छीना तो किसी की गृहस्थी ही उजाड कर रख दी है। सडको से लेकर घरो में किचन तक बाढ मे बहकर आई कापन चिकनी मिट्टी का जमावडा लगा गया है।

इस कापन चिकनी मिट्टी के कारण फिसलन से सडको पर हादसे होने लगे है। बाढ के पानी में जो मकान डूबे थे, वे अभी अडग खडे जरूर है लेकिन उनके अस्तित्व की नीव पूरी तरह से कमजोर हो चुकी है। जो किसान कर्ज के बोझ तले दबा है, उन किसानो के चेहरे पर भी परेशनी और चिंता की झुर्रीया नजर आ रही है। क्योकि जिन जिन किसानो के खेत में बाढ का पानी भरा, वहां की फसले भी पूरी तरह चौपट हो चुकी है। अपनी बर्बादी का नजारा देखने के बाद लोगो की आशायें और उम्मीदे भी जख्मी हो गई है, बहरहाल अब उनके जख्मो पर मरहम लगाने की आवश्यक्ता है। तस्वीरे और अपने घरो के हालात देखने के बाद लोग अब शासन-प्रशासन से मुआवजा की आशा लगाये बैठे है।

दरअसल, 26 सालो के इतिहास में जिले में बहने वाली वैनगंगा, बावनथडी, बाघनदी, सोननदी,घिसर्री, देवनदी, बंजर नदी और उसकाल नदी सहित इत्यादि नादियों में बाढ का ऐसा नजारा देखने नही मिला, जहां इस वर्ष लोगो ने इन नदीयों के सबाब का दंश झेला है। इन नदीयों में आई उफनाती बाढ से सैकडो मकान क्षतिग्रस्त हो गये है तो वही किसानो के द्वारा खेतो में लगाई गई धान की फसले भी बर्बाद हो गई है। इसके अलावा जिले में हुई भारी अतिवृष्टि की मार भी लोगो को छेलना पडा है जिसके असर से कई सडके और पुल पुलिये क्षतिग्रस्त हो गये है। पानी के तेल प्रवाह से पहाडियों में भूस्खलन जैसी नौबत आई गई जहां कई जगह से भूस्खलन के लाईव नजारे देखने मिले। भूस्खलन से जिले का मुख्य बालाघाट-बैहर मार्ग पुरी तरह से ध्वस्त हो गया है, जहां सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन से इस मार्ग से आवागमन पर पूर्णत: पाबंदी लगा दी है।

वैनगंगा नदी में आई भारी बाढ से तटीय क्षेत्र मेंं बसने वाले गोंगलई, गायखुरी, कुम्हारी, खैरी, गर्रा, भटेरा, गौरीशंकर नगर सहित अनेक गांव और कस्बो में पानी घुस गया था जिसकी वजह से कई परिवारो का जनजीवन प्रभावित हो गया था, जिन्हे रेस्क्यू के माध्यम से सुरक्षित स्थान पर लाया गया। आज बाढ पीडित कई परिवार अपने ही घर से बेघर होकर दूसरो की शरण में आ गये है। इसी प्रकार कृषि उपज मंडी गोंगलई और उसके परिसर में स्थित म.प्र राज्य वेयर हाउस कार्पोरेशन की गोदाम में भी करीब 5 फीट पानी भर गया था, जहां समर्थन मूल्य में किसानो से खरीद कर भंडारित किये गये चना व गेहूं की हजारो बोरीयां भीग गई और अनाज अंकुरित होकर दुर्गंध मारने लगे है। साथ ही गोदाम में भंडारित चना, गेहू व धान आदि के रिकार्ड भी बर्बाद हो गये है। इस आफत भरी बाढ से प्रकोप में कुल मिलाकर शासन को भी भारी पैमाने पर आर्थिक क्षति हुई है।

जानकारी अनुसार गोंगलई स्थित वेयर हाउस गोंदाम में किसानो से समर्थन मूल्य पर खरीदे गये चने की लगभग 43 हजार बोरीयां भंडारित की गई थी। जिनमें 15,555 बोरीयां गोदाम में बाढ का पानी भरने से भीग गई। जहां चना अंकुरित होकर दुर्गंध मार रहे है। जिला प्रबंधक एम.बी पाटिल के अनुसार करीब 4 करोड रूपये मूल्य का चना खराब हो गया है। साथ ही गोदाम में समर्थन मूल्य पर गरीदे गये गेहू की 22,580 बोरीयो का भी डंप किया गया था, जिनमें 8955 बोरी बाढ के पानी से भीग गई। यहां लगभग 93 लाख से अधिक मूल्य का गेहू खराब हो चुका है। इस तरह गोंगलई गोदाम मे भंडारित किये गये चना और गेंहू जो खराब हुए है उनकी लगभग 5 करोड रूपयें किमत आंकी गई है।