मिसाल: आंगनबाडी में पढ रही आईएएस दंपत्ती की बेटी

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भोपाल, शासकीय सेवा से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अपने लाड़ले को भले ही गरीब परिवार के बच्चों के पोषण केंद्र रूप में गिनी जाने वाली आंगनवाडिय़ों में अपने बच्चे को भेजना पसंद न करता हो, लेकिन जानकर आश्चर्य होगा, कि प्रदेश के कटनी जिले के कलेक्टर को इन आंगनवाडिय़ों से परहेज नहीं है। बेहतर माहौल के नाम पर बिटिया को उच्च संस्कारों के लिए किसी कांवेंट में दाखिल कराने के बजाय आंगनवाड़ी में भेजने के निर्णय पर डॉ पंकज जैन यह कहते हुए अन्य सवालों पर विराम लगा देते हैं कि मुझे लगा कि मेरे बच्चे के लिए यही सही था। इस फैसले पर आईएएस पत्नी तनवी जैन ने भी सहमति जताई है।
दरअसल पैसे और बड़ा पद मिलने के साथ लोग अपने बच्चों की पढ़ाई किसी महंगे स्कूल से कराना पसंद करते हैं। वहीं कटनी के जिलाधिकारी डॉ. पंकज जैन और उनकी आईएएस पत्नी तनवी जैन ने मिसाल कायम की है।

आर्थिक रूप से संपन्न होने के बाद भी ये आईएएस दंपत्ति अपनी लाडली बच्ची पंखुड़ी को शहर के आंगनबाड़ी केंद्र में भेजते हैं। डीएम की बेटी होने के बाद भी उसके लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं होती। वह आम बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर पढ़ाई करती है। डीएम की बेटी के साथ आंगनबाड़ी केंद्र में कोई ऑटो चालक का बेटा तो कोई मजदूर का बच्चा पढ़ता है। डीएम जब भी अपनी बच्ची को लेकर आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं तो बच्चों के बीच टॉफी बांटते हैं। इस वजह से यहां के बच्चे उन्हें टॉफी वाले अंकल के नाम से जानते हैं। बीते 2 माह से अधिक समय से चल रहे इस क्रम के दौरान डॉ जैन ने महसूस किया कि जिले के अन्य आंगनवाडिय़ों में व्यवस्था सुदृढ़ होगी।

सभी आंगनवाडिय़ों में बिजली और पंखे
चर्चा में डॉ पंकज जैन ने कहा कि गर्मी के माहौल में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में बिजली आवश्यक है। इसके साथ ही पंखों का होना भी जरूरी है। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसकी पूर्ति के लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। इसके मद्देनजर शासन को भी पत्र भेजा गया है। यहां बता दें कि प्रदेश में कुल 453 समेकित बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। 453 बाल विकास परियोजनाओं में कुल 80,160 आंगनबाड़ी केन्द्र एवं 12,070 उप आंगनबाड़ी केन्द्र स्वीकृत हैं। इन आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लगभग 97.68 लाख हितग्राहियों को आईसीडीएस की सेवाओं से लाभान्वित किया जा रहा है।

है अनौपचारिक शिक्षा केंद्र
आंगनवाडिय़ों को सामान्यत: टीकाकरण पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, पूरक पोषण आहार वितरण केंद्र के रूप में जाना जाता है। लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों का मुख्य उददेश्य बच्चों का मानसिक विकास करना भी है जिससे वह प्राथमिक स्कूल में और बेहतर तरीके से शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती हैं। बच्चों को प्राकृतिक संसाधनों जैसे -जल, जंगल, जानवर, इत्यादि के बारे में प्रारंभिक ज्ञान कराया जाता है।

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