विजय के लिए बगलामुखी के दरबार में तंत्र साधना करा रहे प्रत्याशी

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मप्र के कई बड़े नेताओं के लिए हो रहा है पूजा-पाठ

भोपाल। उपचुनाव का बिगुल बजते ही आगर मालवा के नलखेड़ा में स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी के दरबार में तंत्र साधना का दौर शुरू हो गया है। मंदिर सूत्रों का कहना है कि कई बड़े नेताओं के लिए पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया है। नेता अपने दुश्मन पर विजय और उपचुनाव में जीत के लिए तंत्र-मंत्र करने आ रहे हैं।

आगर मालवा जिले के नलखेडा में स्थित प्रसिद तांत्रिक शक्तिपीठ मां बगलामुखी मंदिर देश भर के भक्तों के साथ साथ चुनावी समर में नेताओं की भी खास पूजन स्थली बना हुआ है। हवन-पुजन के जरिए शत्रु पर विजयश्री और समस्त बाधाओं को दूर करने के लिए माता का यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर में सभी कामों की सिद्धि दात्री मां बगलामुखी मध्य में स्थित हैं। उनके एक ओर धन दायिनी महा लक्ष्मी और दूसरी ओर विद्यादायिनी महा सरस्वती विराजित हैं। नलखेडा में इस स्थान पर मां बगलामुखी पीताम्बर रूप में शाश्वत काल से विराजित है।

कोरोना ने बंद कराया हवन
मां बगलामुखी मंदिर में मान्यता है कि यहां विशेष हवन पूजन करने से विजय प्राप्त होती है। ऐसे में चुनाव के इन दिनों में विजयश्री के आशीर्वाद के लिए प्रदेश ही नहीं देश भर के नेताओ और उनके परिजनों का भी हवन पूजन के लिए लगातार आना जारी रहता है। चुनाव में टिकट लेने से लेकर चुनाव की मतगणना तक कई दर्जन नेताओं के नाम से यहां के पंडित अनुष्ठान करते हैं। इनकी पूर्णाहुति के लिए नेता और उनके परिवार यहां पहुंचते रहे हैं। हालांकि इस बार कोरोना के कारण इस मंदिर में हवन अनुष्ठान पर रोक लगाई हुई है। इसलिए यहां पर नेता सिर्फ दर्शन कर लौट रहे हैं। और पंडितो से निजी स्थानों पर हवन करा रहे हैं।

वीवीआईपी की लंबी लिस्ट
पिछले चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा की बहू निहारिका राजे, भाजपा की कृष्णा गौर, आकाश विजयवर्गीय, रामेश्वर शर्मा, उषा ठाकुर, कांग्रेस के हुकुमसिंह कराड़ा, जीतू पटवारी, बाला बच्चन, जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, तुलसी सिलावट सहित दर्जनों नेताओ ने हवन करवाया था।

कमलनाथ ने की चुनाव अभियान की शुरुआत
इस बार मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत माता के इसी मंदिर में पूजन अर्चना करने के बाद की है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, जयवर्धन सिंह के अलावा सुवासरा सीट से कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ रहे राकेश पाटीदार भी यहां दर्शन कर चुके है। मार्च माह में कांग्रेस सरकार गिरने से कुछ दिन पहले बीजेपी के गोपाल भार्गव और प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने भी यहां हवन पूजन किया था।

ये है मान्यता
कहा जाता है मां बगलामुखी की उपासना और साधना से माता वैष्णोदेवी और मां हरसिद्धि के समान ही साधक को शक्ति के साथ धन और विद्या मिल जाता है। मां बगलामुखी की इस विचित्र और चमत्कारी मूर्ति की स्थापना का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। किवंदति है कि यह मूर्ति स्वयं सिद्ध स्थापित है। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव जब विपत्ति में थे तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें मां बगलामुखी के इस स्थान की उपासना करने के लिए कहा था। तब मां की मूर्ति एक चबूतरे पर विराजित थी।पांडवों ने इस त्रिगुण शक्ति स्वरूपा की आराधना कर विपत्तियों से मुक्ति पायी और अपना खोया हुआ राज्य वापस पा लिया।

श्मशान की मौजूदगी से तंत्र-मंत्र का अहसास
बगलामुखी के इस मंदिर के आस पास की संरचना देवीय शक्ति के साक्षात होने का प्रमाणित करती हैं। मंदिर के उत्तर दिशा में भैरव महाराज का स्थान, पूर्व में हनुमान प्रतिमा है। मंदिर के पीछे लखुन्दर नदी बहती है। मंदिर की चारो दिशाओं में श्मशान की मौजूदगी तंत्र क्रियाओं का आभास कराती है। नवरात्र के दौरान हवन का विशेष महत्त्व है। माता के इस मंदिर में लाल मिर्ची और सरसों से भी हवन किया जाता है।

जीत का आशीर्वाद
बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता यही मानते हैं कि जीत का आशीर्वाद उन्हें इसी मंदिर में दर्शन पूजन के बाद ही मिला है। उपचुनाव का काउंट डॉउन जारी है। उपचुनाव के इस व्यस्त माहौल के बीच नेता समय निकालकर मां बगलामुखी की शरण में पहुंच रहे हैं।