अखाड़े साधुओं के लिए हैं, किन्नरों के लिए नहीं, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

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नरसिंहपुर, अखाड़े साधुओं के लिए हैं, किन्नरों के लिए नहीं, दो टूक शब्दों में यह कहना है जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का। नरसिंहपुर जिला अंतर्गत झोतेश्वर आश्रम में दैनिक लोकदेश से चर्चा के दौरान शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रयागराज में स्वामी वासुदेवानंद के फैसले पर नाराजगी जतायी है। शंकराचार्य ने किन्नरों के अखाड़े को मान्यता दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि वासुदेवानंद सनातन धर्म को क्षति पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसके पीछे शंकराचार्य का तर्क था कि सनातन हिंदू धर्म में अखाड़े सिर्फ साधुओं के लिए बनाए गए थे। लिहाजा प्रयागराज में आयोजित कुंभ में किन्नरों के द्वारा बनाए गए अखाड़े को सनातनियों ने मान्यता नहीं दी। लेकिन अब भाजपा की सह पर वासुदेवानंद इस अखाड़े को सर्टिफिकेट बांटने में जुटे हैं।

Areas are for the sadhus, not for kinars, Swami Swaroopanand Saraswati
swaroopanand ji

योगी से भी नाराज
एक सवाल के जवाब में उन्होंने वासुदेवानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि हाईकोर्ट पहले ही यह कह चुका है कि सनातन धर्म में चार शंकराचार्य के अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य बताता है तो वह अपराधी है, लेकिन सरकार से मिल रहे प्रश्रय के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। क्योंकि इनका उद्देश्य सनातन धर्म की व्यवस्था को कमजोर करना है। यही कारण है कि वह मान्य शंकराचार्य के मुकाबले अन्य को खड़ा करना चाहते हैं।

गुस्से में साधु -संत
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ मेले के तारतम्य में वासुदेवानंद के इस कृत्य से देश के साधु-संतों में नाराजगी है। इसके मद्देनजर वह गोष्ठी कर रहे हैं और विमर्श के बाद आवश्यक व कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। क्योंकि धार्मिक मर्यादाओं का धीरे-धीरे लोप अब किसी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राम मंदिर के लिए होगा शिलान्यास
स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि जल्द ही वह अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। इससे पहले देश के सभी अखाड़ों के धर्माचार्यों की उपस्थिति में विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके लिए प्रयाग में इसी महीने की आखिर में 28, 29 और 30 को धर्म संसद बुलाई गई है।

जबकि पूर्व से चले आ रहे 13 अखाड़ों के अलावा किसी अन्य को इसमें शामिल नही किया गया है। इस बात की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना भी की जा रही है। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने सोशल मीडिया में लिखी गई, कुछ पोस्टों का भी जिक्र भी किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि, किन्नर अखाड़े में साधु-संत के बजाय गैर हिंदू भी होते हैं, जिनके यहां अखाड़े के प्रावधान ही नहीं है। इसलिए भी इनको मान्यता नहीं दी जा सकती है।

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