पाक के आतंक को मुंहतोड जवाब देने आ रही 240 इजराइली स्पाइक मिसाइल

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लखनऊ: लखनऊ में डिफेंस एक्सपो का रविवार को समापन हुआ है. डिफेंस एक्सपो में भारत की शक्ति का प्रदर्शन किया गया. इस शक्ति प्रदर्शन में स्पाइक मिसाइल शामिल थी जिसे भारत इजरायल से खरीद रहा है. 240 स्पाइक मिसाइल की डील फाइनल हो चुकी है और इजरायल से ही भारत खरीद रहा है. हेरॉन टीपी ड्रोन जो सिर्फ निगरानी नहीं करेगा, दुश्मनों पर आग भी उगलेगा.

भारत और इजराइल के बीच 240 स्पाइक मिसाइलों के साथ-साथ 12 लॉन्चर्स की डील सील हो चुकी है. इससे पहले, भारत ने स्पाइक मिसाइल को अमेरिकी एंटी टैंक मिसाइल जैवलिन के मुकाबले में चुना था लेकिन फिर बात खटाई में पड़ गई. खूबियों की वजह से स्पाइक अब नॉर्दर्न कमांड के भारतीय शूरवीरों के हाथ होगी.

स्पाइक मिसाइल के मार्केटिंग हेड गेल पैपियर का कहना है, “आपके दो सैनिक लॉन्चर को संभालेंगे. एक लॉन्चिंग सिस्टम के साथ बैक पैक को उठाएगा जिसका वज़न 14 किलोग्राम होगा. दूसरा दो राउंड को संभालेगा. ये 24 किलो का होगा और दोनों स्पाइक को 4 किमी. रेंज तक फायर कर सकेंगे.”

इजराइल में बनी स्पाइक चौथी पीढ़ी की एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है. खासियत है कि दागो और भूल जाओ. टैंकों की दुश्मन ये मिसाइल लॉन्च होने से पहले ही लक्ष्य तय कर लेती है. साथ ही ये अंतिम वक्त में अपना टारगेट अपडेट भी कर सकती है. उसके बाद लक्ष्य तक का रास्ता खुद तय करती है.

स्पाइक के कई वर्ज़न हैं जो इसकी ज़रूरत के हिसाब से इसकी रेंज को लेकर तैयार किए गए हैं. डेढ़ किलोमीटर से लेकर 25 किलोमीटर की दूरी तक टैंक को बर्बाद करने की क्षमता वाली मिसाइल एक घातक हथियार है. स्पाइक की एक खास मिसाइल तो नजरों से ओझल लक्ष्य पर भी वार कर सकती है. अब ये जान लीजिए कि स्पाइक से दुश्मन के टैंक क्यों डरते हैं.

एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल में खास तरह का विस्फोटक लगा होता है जो टैंक के कवच को चीर देता है. ये फ़ौलाद को भी पिघला देती हैं. मज़बूत से मज़बूत टैंक का क्रू भी इनसे नहीं बच सकता. स्पाइक जैसी मिसाइलें टैंक या बख्तरबंद गाड़ियों के ऊपर से अटैक करती है जहां कवच बाकी जगहों के मुकाबले कमजोर होता है. घातक विस्फोटकों से लैस ये मिसाइल एक ही वार में लक्ष्य का काम तमाम कर देती है. एंटी टैंक मिसाइलों की दुनिया में और भी कई खिलाड़ी हैं जिनसे दुश्मनों के टैंक डरते हैं. ये मिसाइल दुनिया की कुछ सबसे अचूक मिसाइलों में एक है और इससे स्वागत का मतलब है दुश्मन का सर्वनाश.

भारत-पाकिस्तान के बीच हुए करीब-करीब सभी युद्ध में कवचधारी टैंकों की भूमिका बड़ी रही है. 50-60 टन वजनी ये मशीनें युद्धभूमि में अजेय रहती हैं और कुछ ही घंटों में युद्ध का नतीजा पलट सकती हैं. ज़ाहिर है पाकिस्तान के टैंकों के लिए अब नई मिसाइलों की ज़रूरत है.

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