शहीद की पत्नी बोलीं- ‘पति की अधूरी ड्यूटी को पूरा करने के लिए मेरा बेटा भी सीआरपीएफ में शामिल होगा’

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भुवनेश्वर 

पुलवामा हमले में ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के प्रसन्ना साहू भी शहीद हो गए। उनके परिवार में मातम का माहौल है। पत्नी मीना अपने घर के एक कोने में बैठी हुई हैं, उनका चेहरा आंसुओं से सराबोर है। वह कुछ महिलाओं से घिरी हुई हैं जो उन्हें सांत्वना दे रही हैं लेकिन उनके हाथ दृढ़ है और वह अपने बेटे की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, 'मेरे पति की जो ड्यूटी अधूरी रह गई है उसे पूरा करने के लिए जगन सीआरपीएफ में शामिल होगा।' 
शहीद प्रसन्ना के गांव शिखर लोग उनकी शहादत पर बात कर रहे हैं और आंतकियों पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। प्रसन्ना के परिवार को गुरुवार को रात 11 बजे सीआरपीएफ हेडक्वॉर्टर से उनके शहीद होने की खबर मिली है। प्रसन्ना (48) सीआरपीएफ की 61वीं बटालियन में हेड कॉन्स्टेबल थे। आंतकी हमले में जान गंवाने के बाद उनकी पत्नी मीना (44) और बेटे जगन (16) और बेटी रोनी (18) का रो-रोकर बुरा हाल है। वह 1995 में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे। 

उनके इकलौते बेटे जगन ने कहा, 'सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए और कम से कम 420 आतंकी मारे जाएंगे।' जगन 12वीं का छात्र है जबकि उसकी बहन रोनी ग्रैजुएशन फर्स्ट ईयर में पढ़ती है। रोनी कहती हैं, 'मुझे अपने पिता पर गर्व है लेकिन इस सदमे से बाहर आना मुश्किल है।' 

उनके बड़े भाई धुरुबा कहते हैं, 'पिछले साल प्रसन्ना ने गांव में अपना घर बनवाना शुरू किया। उनकी योजना इसे इस साल पूरा करने की थी लेकिन ऐसा कुछ करने से पहले ही वह चले गए।' गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आत्मघाती हमले में शहीद होने जवानों की संख्या 40 हो गई है। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले की एक बस में कार बम से हमला किया गया। 
 

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