भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां की धरोहर फिलहाल टूटने से बची, 48 घंटे में दूसरी बार पहुंची वीडीए की टीम

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वाराणसी 
भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां की अनमोल धरोहर फिलहाल टूटने से बच गई है। बेनियाबाग स्थित भीखमशाह लेन में स्थित मकान में बिस्मिल्लाह खां के कमरे को तोड़े जाने को लेकर वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने नोटिस जारी की है। बुधवार को वीडीए के जोनल अधिकारी ने उनके पैतृक निवास पर जाकर परिजनों को नोटिस थमाई। नोटिस में बिल्डर का नाम भी लिखा हुआ है। 48 घंटे में दूसरी बार वीडीए के अफसर बिस्मिल्लाह खां के घर पहुंचे हैं। इससे पहले सोमवार को भी वीडीए की टीम पहुंची थी और मौखिक रूप से कोई तोड़फोड़ नहीं करने की चेतावनी दी थी। इस बार लिखित चेतावनी पकड़ाई गई है। वीडीए ने अब कोई निर्माण न तोड़ेने की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भवन जर्जर भी हो तो तोड़े जाने से पहले नगर निगम से अनुमति लें। वीडीए के अधिकारियों ने बिस्मिल्लाह खां के परिजनों से कहा है अगर निर्माण तोड़े जाने के पीछे नये निर्माण की मंशा है तो भी पहले नक्शा पास कराया जाए इसके बाद ही नया निर्माण शुरू हो सकता है। वीडीए की नोटिस में निर्माण तोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों में उनके परिजन मोहम्मद शिफतैन व बिल्डर गुड्डू मुरमुर का नाम लिखा है। उल्लेखनीय है कि बिस्मिल्लाह खां जिस कमरे में रियाज करते थे उसे तोड़ा जा रहा है। जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया है। वीडीए उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने बताया कि फोन पर बिस्मिल्लाह खां जी के निवास स्थान के तोड़े जाने की शिकायत मिली थी। सोमवार को जोनल अधिकारी वीके मिश्रा ने मौके पर जाकर निर्माण रुकवाया था और अब नोटिस दी गई है। नगर निगम को इस संबंध में सूचना दे दी गई है। 

कई हस्तियों ने तोड़फोड़ पर जताई है आपत्ति
देश के कई नामचीन कलाकारों ने भी भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के आवास को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की हिमायत शुरू कर दी है। पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र ने साफ लफ्जों में कहा है कि उस्ताद का आवास सरकार अविलंब कब्जे में लेकर यथास्थिति बनाने रखे और उस भवन को म्यूजियम के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू करे। ‘अनदेखी: संकट में उस्ताद की अनमोल स्मृतियां’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित समाचार को संज्ञान में लेते हुए पं. राजन-साजन मिश्र ने दिल्ली से फोन पर कहा कि भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का आवास कोई मामूली आवास नहीं है। वह इमारत फकीरी शैली के बादशाह का महल है। इमारत की दीवारें, सीढ़ियां, खिड़कियां, उनकी सूतरी की खटिया, चांदी की शहनाई उस्ताद के फर्श से अर्श तक के सफर की गवाह है। इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर उस्ताद का कमरा उस महल का दरबार है।

बनारस की तंग गलियों में मौजूद पुराने मकान में उस्ताद की विस्तार यात्रा देखने का हक नई पीढ़ी को भी है। सरकार को चाहिए की उनके परिजनों के पुनर्वास की व्यवस्था करते हुए उस भवन को म्यूजियम के रूप में तब्दील कर करे, क्योंकि बिस्मिल्लाह बार-बार पैदा नहीं होते। कोलकाता के संतूरवादक पं. तरुण भट्टाचार्य ने कहा कि उस्ताद अब किसी एक परिवार की संपत्ति नहीं रह गए हैं। वह पूरे राष्ट्र की थाती हैं। उनका घर शहनाई का मंदिर है। उसे नहीं बचा सके तो यही कहना होगा कि शहनाई, बिस्मिल्लाह लेकर आया था और वही लेकर चला गया। पद्म विभूषण छन्नूलाल मिश्र ने कहा कि उस्ताद का आवास बनारस की तंग गलियों में बसा पुरातन शैली की इमारत का नायाब नमूना भी है। उसका संरक्षण होना ही चाहिए। मोहनवीणा वादक पं. विश्वमोहन भट्ट, ओडिसी नृत्यांगना संचिता भट्टाचार्य, बांसुरी वादक पं. रोनू मजूमदार, भजन गायक अनूप जलोटा और संगीत निर्देशक स्माइल दरबार ने भी बिस्मिल्लाह खां की धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए आवाज उठाई है। उस्ताद के पैतृक आवास के साथ छेड़छाड़ की सूचना पर इन कलाकारों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इनका कहना है कि उस्ताद और उनसे जुड़ी यादें देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों की धरोहर है। उसकी हिफाजत की जिम्मेदारी शासन, प्रशासन और जनता तीनों की है।