बिहार समेत देश में 65 सीटों पर होने हैं उपचुनाव, अकाली दल का सरकार से अलग होना क्या मैटर करेगा

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नई दिल्ली
किसानों के मुद्दे पर अकाली दल के अलग होने से एनडीए गठबंधन तो प्रभावित हुआ ही है, भाजपा को भी झटका लगा है। खासकर तब जबकि उसके सामने बिहार विधानसभा व देश के विभिन्न हिस्सों में 65 उपचुनाव होने हैं। किसानों का मुद्दा संवेदनशील है और पार्टी इसे जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है। अकाली दल का केंद्र सरकार से अलग होना सीधे तौर पर तो पंजाब की राजनीति से जुड़ा हुआ है, जहां किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह लगातार अकाली दल पर हमला बोल रहे थे। साथ ही, अकाली दल को चुनौती भी रहे थे, क्योंकि राज्य में अकाली दल की मुख्य ताकत किसान रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में किसान कृषि से जुड़े संसद में लाए गए तीन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। जब लोकसभा से एक विधेयक पारित हो गया और दो विधेयकों को पारित कराने की तैयारी चल रही थी तभी अकाली दल ने सरकार छोड़ने का निर्णय लिया। उसकी मंत्री हरसिमरत कौर ने अपना इस्तीफा भेज दिया जिसे स्वीकार भी कर लिया गया।

अकाली दल के इस तरह से अलग होने से एनडीए को झटका लगा है। शिवसेना एनडीए से अलग हो चुकी है और जदयू ने भी एक बार उससे नाता तोड़ा। हालांकि, बाद में वह उसके साथ आ गया। अकाली दल भी देर सबेर एनडीए छोड़ सकता है। पंजाब में कांग्रेस से सीधी लड़ाई होने से वह विपक्षी खेमे में तो नहीं जायेगा, लेकिन बीजद जैसी भूमिका अपना सकता है।

दूसरी तरफ भाजपा के अन्य सहयोगी दलों को इससे झटका लग सकता है क्योंकि एनडीए से अलग हुए सहयोगी दल भी गठबंधन के अंदर सब कुछ ठीक ना होने की बात उठाते रहे हैं। राजनीतिक तौर पर भी गठबंधन की राजनीति में भाजपा को इससे नुकसान हुआ है क्योंकि अकाली दल वैचारिक स्तर पर भी भाजपा के सबसे पुराने सहयोगी दलों में शामिल रहा है।

पंजाब की राजनीति में भी इससे असर पड़ेगा क्योंकि भाजपा शहरों तक सीमित है और अकाली दल के साथ गठबंधन में प्रभावी भूमिका में रहती है। हालांकि, बीते सालों में भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की थी जिस पर अकाली दल का विरोध रहा था। 

दरअसल, बीते विधानसभा चुनाव में अकाली भाजपा सरकार की हार के बाद से ही दोनों दलों में कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। अब डेढ़ साल बाद चुनाव है। अकाली दल को अपनी जमीन की ज्यादा चिंता हो रही है और वह नहीं चाहता है कि कांग्रेस उससे उसका किसानों का बड़ा वोट बैंक छीन ले। इसलिए उसने सरकार छोड़ने का फैसला किया और राज्य की राजनीति को देखते हुए गठबंधन से अलग भी हो सकता है।