बिहार: लालू का पहला और सबसे ठोस सियासी ठिकाना छपरा, लेकिन परिवार को नहीं आया रास

0
2

 
नई दिल्ली 

 देश के चंद मजबूत सियासी परिवारों में से एक है लालू यादव का परिवार. जिसके सदस्यों ने बिहार विधानसभा, विधान परिषद से लेकर लोकसभा और राज्यसभा तक लगभग हर बड़े सदन और बिहार से लेकर केंद्र तक की सरकारों का प्रतिनिधित्व किया है. अभी लालू यादव भले ही चारा घोटाले के मामले में जेल की सजा काट रहे हों लेकिन परिवार के सदस्य अभी भी विधायक और सांसद हैं. लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की ओर से चुनावी फेस हैं और नीतीश कुमार के खिलाफ जमकर मोर्चाबंदी भी कर रहे हैं.

लालू यादव का जन्म पश्चिम बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था जो कि पहले सारण का ही हिस्सा था. लालू यादव ने अपनी सियासत की शुरुआत सारण(छपरा) लोकसभा सीट से ही 1977 में महज 29 साल की उम्र में की थी. अपने पहले ही चुनाव में लालू कांग्रेस के सियासी दिग्गज को पटखनी देकर संसद पहुंचे थे. तब से लालू यादव कई चुनाव इस सीट से जीते.

इसके बाद लालू बिहार की प्रादेशिक सियासत में उतरे और 15 साल तक बिहार पर लालू-राबड़ी ने राज किया. इसके बाद बिहार में नीतीश कुमार के उभार के बाद लालू ने यूपीए शासनकाल में केंद्र की सियासत की. 2015 में लालू के प्रचार अभियान और नीतीश कुमार के साथ ने लालू यादव की पार्टी आरजेडी को फिर बिहार की सत्ता में ला दिया. बेटे तेजस्वी यादव नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बने और दूसरे बेटे तेजप्रताप यादव स्वास्थ्य मंत्री. हालांकि, जुलाई 2017 में नीतीश अलग होकर एनडीए में चले गए और आरजेडी विपक्ष में आ गई.

लालू यादव का पहला सियासी ठिकाना छपरा की संसदीय सीट रही. जहां से 1977 में जीतकर लालू संसद पहुंचे थे. यहां से लालू ने 1989 में दूसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता. 2004 का चुनाव भी लालू ने छपरा सीट से जीता. इसके बाद परिसीमन में इस सीट का नाम बदलकर सारण हो गया. 2009 के चुनाव में भी लालू ने यहां से परचम लहराया.

रोक से पहले आखिरी बार कब चुनाव लड़े लालू?
चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने और चुनाव लड़ने पर रोक से पहले लालू ने 2009 में आखिरी बार लोकसभा चुनाव लड़ा था. लालू दो लोकसभा सीटों से उतरे थे. सारण से लालू जीत गए लेकिन पाटलीपुत्र से अपने पुराने साथी रंजन यादव से हार गए. 2013 में चारा घोटाले में सजा सुनाए जाने के बाद लालू के चुनाव लड़ने पर 11 साल के लिए रोक लग गई.

परिवार के लिए इस इलाके का सियासी अनुभव अलग
2014 के लोकसभा चुनाव में लालू यादव की जगह राबड़ी देवी इस सीट से उतरीं लेकिन बीजेपी के राजीव प्रताप रुडी के हाथों 41 हजार वोटों से शिकस्त मिली. 2019 के चुनाव में इस सीट से आरजेडी ने लालू के समधी चंद्रिका यादव उतरे लेकिन बीजेपी के हाथों फिर शिकस्त मिली. अब चंद्रिका यादव भी लालू का साथ छोड़कर जेडीयू में शामिल हो चुके हैं.

परिवार की पॉलिटिकल हिस्ट्री
1997 में लालू के चारा घोटाले में जेल जाने पर राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला सीएम बनी थीं. राबड़ी देवी ने 2010 का विधानसभा चुनाव दो सीटों वैशाली के राघोपुर और सारण की सोनपुर सीट से लड़ा लेकिन दोनों ही सीटों पर हार गईं. राबड़ी देवी वर्तमान में बिहार विधान परिषद की सदस्य हैं और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी हैं.

लालू यादव के बेटे और आरजेडी चीफ तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. तेजस्वी 2015 से 2017 तक बिहार के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. 2015 के चुनाव में तेजस्वी ने वैशाली के राघोपुर सीट से चुनाव जीता था. और राज्य के उपमुख्यमंत्री बने थे.

लालू के बेटे तेजप्रताप यादव भी 2015 के चुनाव में वैशाली जिले की महुआ सीट से उतरे थे. चुनाव जीतकर विधायक बने तेजप्रताप यादव 2015 से 2017 तक बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं. इस बार तेजप्रताप यादव समस्तीपुर के हसनपुर सीट से उतरने की तैयारी में दिख रहे हैं.

 कब है यहां चुनाव?
सारण जिला बिहार को 5 मुख्यमंत्री दे चुका है. सारण जिले में विधानसभा की 10 सीटें आती हैं. ये सीटें हैं- 1. अमनौर, 2. बनियापुर, 3. छपरा, 4. एकमा, 5. गरखा, 6. मांझी, 7. मढ़ौरा, 8. परसा, 9. सोनपुर, 10. तरैया. यहां दूसरे चरण में 3 नवंबर को मतदान होगा. और चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे. यहां वोटरों की संख्या 2 लाख 80 हजार के करीब है. जिसमें से 1,53,790 पुरुष और 1,26,284 महिला वोटर हैं.