पर्यावरण को हानि पहुंचाए बिना किया जाए विकास – अकबर

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रायगढ़
ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ द्वारा  रोल आॅफ इनोवेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप एन्ड मैनेजमेंट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विषय पर दो -दिवसीय डिजिटल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि परिवहन विभाग, आवास एवं पर्यावरण, वन विभाग मंत्री मोहम्मद अकबर ने किया। इस दौरान कहा कि सतत विकास वही है जो पर्यावरण एवं मानवता को हानि पहुंचाए बिना किया जाए। इनोवेशन के लिए आपको कही जाने की आवश्यकता नहीं, आपके आस-पास की आवश्यकताओं पर ध्यान दीजिये और देखेंगे की इनोवेशन तो आपके आँगन से भी आरम्भ हो सकता है।  

मोहम्मद ने भारत और विशेषकर छत्तीसगढ़ की वर्तमान स्थिति के बारे में चर्चा की और कहा की आज के दौर मे तकनीकी विकास बहुत ही तेजी से हो रहा है और आवश्यकताएँ भी बहुत ज्यादा बढ़ रही हैं, जिसकी वजह से इनोवेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप एन्ड मैनेजमेंट की भूमिका भी अहम् हो गयी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण कार्य, क्रयशक्ति बढ़ाने आदि की दिशा में किये गए कार्य तथा किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताया।  उन्होंने नरवा घुरवा एवं बारी योजना के बारे में विस्तृत चर्चा करते हुए इसके माध्यम से होने वाले विकास की विस्तृत जानकारी दी और कहा की सतत विकास वही है जो पर्यावरण एवं मानवता को हानि पहुंचाए बिना किया जाय। उन्होंने सामायिक एवं महत्वपूर्ण विषय पर सम्मलेन आयोजित करने के लिए ओपी जिंदल विश्वविद्यालय को बधाई दिया।

ओपीजेयू के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार,  ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की आवश्यकता एवं उपयोगिता के बारे मे जानकारी दी। उन्होने अत्यधिक कम समय मे ओपीजेयू द्वारा प्राप्त उपलब्धियों को भी सभी से साझा किया। उन्होंने यह भी बताया की बहुत ही कम समय में ओपीजेयू ने कई सम्मान – इमर्जिंग यूनिवर्सिटी आॅफ इंडिया, मोस्ट ट्रस्टेड टेक्निकल यूनिवर्सिटी आॅफ इंडिया , इमर्जिंग यूनिवर्सिटी आॅफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट एवं सिक्स्थ रैंक इन क्लीन कैम्पस इन इंडिया प्राप्त किये हैं। डॉ पाटीदार ने इस दौरान  ओपीजेयू के विज? के साथ-साथ सफलता पूर्वक किये जा रहे इंडस्ट्री-अकेडेमिआ सहयोग  एवं एक्सपीरिएंशियल लर्निंग मेथड्स आदि, जो की इनोवेशन, आंत्रप्रेन्योरशिप एन्ड मैनेजमेंट को बढ़ावा देते हैं, के बारे में विस्तृत रूप से बताया। डॉ. रजत मूना (निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भिलाई) ने अपने सम्बोधन में कहा की आयोजकों द्वारा अत्यंत ज्वलंत विषय संगोष्ठी के लिए चुना गया है।  उन्होंने स्टार्टअप्स एवं उनकी सफलता के बारे में बताया तथा पूर्व छात्रों को जोड़कर इनोवेशन आदि के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।  बढ़ते प्रदूषण के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. रजत ने कहा की इनोवेशन के लिए आपको कही जाने की आवश्यकता नहीं, आपके आस-पास की आवश्यकताओं पर ध्यान दीजिये और देखेंगे की इनोवेशन तो आपके आँगन से भी आरम्भ हो सकता है।  डॉ हिमांशु राय (निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर ) ने कोविड -19  को एक अवसर के रूप में परिभाषित करते हुए कहा की बिना विजन के सफलता प्राप्त करना संभव नहीं।  स्वधर्मा की बात करते हुए डॉ राय  ने प्रतिभागियों से कहा की इंट्रोस्पेक्ट करें और सफलता के लिए ही केवल नहीं भागें।  डॉ राय ने अपने संस्थान के कैम्पस  में किये गए नवाचार एवं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते कैम्पस के बारे में जानकारी देते हुए छात्रों के रूरल इंगेजमेंट प्रोग्राम एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति  संवेदनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित किया।

डॉ भारत भास्कर (निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर) ने अपने सम्बोधन में पृथ्वी एवं जनसँख्या तथा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किये गए एवं किये जा रहे नवाचारों की बात की।  डॉ भास्कर ने सरीखेड़ी गाँव का उदाहरण देते हुए सतत विकास के मॉडल की चर्चा की और नेचुरल रिसोर्सेस के उपयोग पर बल दिया। बिमलेन्द्र झा (संस्थापक, इग्नाइटिंग माइंड्स गुरु और एडवाइज? टू चेयरमैन, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड) ने अपने उद्बोधन में सतत विकास को परिभाषित करते हुए ज्यादा से ज्यादा नवाचार करने की आवश्यकता को बताया तथा कहा की विकास करते हुए 'विन -विन सिचुएशन' क्रिएट करना आवश्यक है जिससे किसी का भी नुक्सान न हो।  उदघाटन सत्र के दौरान विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर साइंस एन्ड इंजीनियरिंग के छात्र आदर्श पाटीदार द्वारा हाई क़्वालिटी स्किल्ड वर्कफोर्स बनाने के लिए इंडस्ट्री -एकेडेमिआ सहयोग पर आधारित ओपीजेयू के उड़ान कार्यक्रम पर बनाये गए विडिओ को लांच किया गया। उड़ान कार्यक्रम का उद्देश्य इंडस्ट्री और एकेडेमिआ के बीच के गैप को कम करके म्यूच्यूअल ग्रोथ एवं डेवलपमेंट के लिए कार्य करना है।  

कार्यक्रम के अंत में डॉ एस. नायक , एसोसिएट डीन, स्कूल आॅफ मैनेजमेंट ने सभी मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, मैनेजमेंट, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के सहयोग के लिए आभार प्रदर्शित करते हुए  धन्यवाद ज्ञापित किया।  उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ जयलक्ष्मी सामल  ने किया। इस अवसर पर पंजीकृत प्रतिभागियों के साथ-साथ सभी प्राध्यापकगण एवं छात्र उपस्थित रहे।