तीन दौर के मैदानी सर्वे के साथ ही कमलनाथ ने किया है गहन मंथन

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भोपाल
मध्य प्रदेश में होने जा रहा है 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर कांग्रेस पूरी तरह संजीदा नजर आ रही है। यहां तक की बनाए गए पार्टी प्रत्याशियों को कई एंगल से जांच परख कर शीशे पर उतारा गया है। साथ ही कम से कम तीन आंतरिक चुनावी सर्वेक्षण मैं मिले परिणाम के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने हर दृष्टि से  गंभीरऔर गहन मंथन के बाद हरी झंडी दी है। यह बात अलग है कि कई सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पसंद को भी तवज्जो मिली है, किंतु उनके सुझाव सामने आने के बाद भी कार्यकर्ताओं की राय और सर्वे रिपोर्ट को ही आधार बनाया गया है।

 टिकट वितरण को लेकर हाई प्रोफाइल बन चुकी मेहगांव सीट को ही ले लिया जाए तो स्पष्ट है कि दिग्विजय सिंह और उनके समर्थकों के विरोध को तो पूरा ध्यान में रखा गया किंतु उनकी पसंद के नेता को हारजीत के पैमाने के आधार पर प्रत्याशी नहीं बनाया गया और उनके स्थान पर अपने पसंद के पूर्व विधायक हेमंत कटारे पर कमलनाथ ने दांव लगाया है। इसी तरह कार्यकर्ताओं की पुरजोर मांग के बाद उन्होंने बदनावर सीट पर समय रहते प्रत्याशी बदलने में भी कोई देर नहीं की। मलहरा सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर उदापोह की स्थिति निर्मित हो गई थी। प्रदेश के कई नेता अपनी अपनी पसंद के आधार पर स्थानीय प्रत्याशी पर जोर लगा रहे थे किंतु कमलनाथ ने समस्त संभावनाओं पर विराम लगाते हुए जीत की सम्भावना वाले एक साध्वी को कांग्रेस प्रत्याशी बनाया है।

बसपा को हल्के में ले रही कांग्रेस
       मध्यप्रदेश में तीसरी शक्ति बनकर सरकार की चाबी अपने हाथों में रखने के लिए बेताब बहुजन समाज पार्टी को कांग्रे स  बहुत हल्के में ले रही है। संभवत यही कारण है कि बसपा सुप्रीमो मायावती से इस बार उप चुनाव में गठबंधन को लेकर कोई संवाद नहीं हुआ। जबकि ग्वालियर चंबल अंचल के 4 से 5 सीट ऐसी है जहां बसपा प्रत्याशी के चुनाव मैदान में होने के कारण दलित मतदाताओं के ध्रुवीकरण से कांग्रेश को चुनावी हानि उठानी पड़ सकती है। संभवत यही कारण है कि कांग्रेस ने एक चुनावी रणनीति के तहत बसपा के कई बड़े नेताओं को ना सिर्फ कांग्रेस में मिलाया है बल्कि उनमें से 4 को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है।