चीन टकराव वाले स्थानों पर सैनिक गतिविधियां बढ़ा सकता

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 नई दिल्ली 
अभी लद्दाख सेक्टर में भीषण सर्दी की वजह से भले ही चीनी सैनिक ठंडे पड़ गए हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्लानिंग करने वालों को आशंका है कि मार्च अंत में बर्फ पिघलने की शुरुआत के साथ ही चीन टकराव वाले स्थानों पर सैनिक गतिविधियां बढ़ा सकता है। कई दौर की बातचीत के बाद भी टकराव वाले स्थानों से पीएलए सैनिक की वापसी शुरू नहीं हुई है और इस बीच चीन ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में अडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स, सैनिकों के लिए घर और होटन एयरबेस से काराकोरम पास तक जल्दी पहुंचने वाले रास्ते का निर्माण कर लिया है। एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा, ''डेपसांग उभार के उत्तर में सैन्य दबाव हो सकता है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि नौवें दौर की सैन्य वार्ता के लिए जल्द तारीखें तय की जा सकती हैं और तनातनी को कम करने के लिए अच्छी प्रगति की उम्मीद है। हालांकि, सरकार में दूसरा पक्ष इसके ठीक उलट है और जो मानता है कि चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की 100वीं वर्षगांठ में शी जिनपिंग के भाषण से पहले चीनी सैनिक पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''यह दुर्भाग्यपूर्ण रिकॉर्ड है।'' समय जितना भी लगे भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में जमे रहने के लिए तैयार बैठी है, जबकि चीन का रुख इस बात से भी प्रभावित हो सकता है कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे जो बाइडेन का रवैया बीजिंग के प्रति कैसा होता है। हालांकि कई लोगों का मानना ​​है कि आने वाला अमेरिकी प्रशासन चीन को अन्य महाशक्ति के रूप में अपनी मान्यता देकर संतुलन बना सकता है, यह नया G-2 फैक्टर रूस जैसे पूर्व महाशक्तियों को नुकसान पहुंचाएगा।