कांग्रेस के 13 उम्मीदवारों की घोषणा 22 सितम्बर को ?

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भोपाल
मध्य प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव को लेकर माना जा रहा है कि भाजपा ने अपने सभी उम्मीदवार लगभग तय कर लिए हैं किंतु औपचारिक घोषणा शेष है। इसके उलट कांग्रेस ने पहली खेप में 15 उम्मीदवारों की घोषणा कर इस मामले में बढ़त हासिल कर ली है। माना जा रहा है की शेष रहे तेरह  उपचुनाव वाले सीटों पर आने वाले 22 सितंबर को पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा की जा सकती है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने ब्यावरा को छोड़कर सभी 12 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए हैं और जो सूची तैयार की गई है उसे लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ 20 सितंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं |जहां कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक और पार्टी के प्रमुख नेता सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के समक्ष अंतिम मुहर हेतु यह सूची रखी जाएगी। इसके बाद संभव है कि पूर्व की तरह दिल्ली से ही प्रत्याशियों की सूची जारी की जा सकती है। इस बीच यह तथ्य भी सामने आया है कि इन सीटों पर अधिकांश दावेदारों ने अपनी दावेदारी कमलनाथ के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक के समक्ष प्रस्तुत की है। ऐसी दशा में अंतिम निर्णय के पहले तीनों नेता साथ बैठकर एक बार फिर इसमें फेरबदल कर सकते हैं। इसमें पार्टी के स्थानीय नेताओं से मिले फीडबैक और पार्टी द्वारा मैदानी स्तर पर कराए गए आंतरिक सर्वे से मिले संकेतों को आधार बनाया जा सकता है।

कांग्रेस सभी प्रत्याशियों के नाम घोषित कर यह भी जाहिर करना चाहती है कि उनके पास चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों की कोई कमी नहीं है। ऐसा करके भाजपा के उन आरोपों का जवाब भी दिया जा सकता है, जिसमें कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास दावेदारों की कमी है। साथ ही पार्टी एक तरह से मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा से चुनावी बढ़त दर्शना चाहती है। बता देगी कांग्रेस ने अभी मुरैना ,पोहरी मेहगांव ,सुमावली ,जावरा ,बड़ा मलहरा ,मांधाता ,सुवासरा ,ग्वालियर पूर्व ,मुंगावली ,बदनावर और ब्यावरा सीट पर अभी अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। यह भी तथ्य सामने आया है कि सुरखी और ग्वालियर पूर्व सहित कुछ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और बसपा से आए पार्टी नेताओं को कांग्रेस अपना प्रत्याशी बना सकती है।

कांग्रेस का प्लान बी
किसी भी चुनाव में कांग्रेस जब भी पार्टी टिकट की घोषणा करती  है तब किन्ही कारणों से टिकट से वंचित रहे लोगों में असंतोष उभर कर सामने आता है। कई बार तो यह सड़क में प्रदर्शन और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ के रूप में दिखाई देने लगता है। लेकिन इस बार पार्टी के 15 सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा के बावजूद प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया। यह पार्टी  के लिए संतोष की बात हो सकती है। इसके बावजूद कांग्रेस ने प्लान बी पर काम करना शुरू कर दिया है जिसके तहत विरोध और भीतरघात  से निपटने के लिए समन्वय की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को दी जा चुकी है। उनके साथ संबंधित अंचल  के कुछ अन्य प्रभावशाली नेताओं को भी इस दिशा में लगातार काम करने को कहा गया है। ताकि किसी भी सूरत में कांग्रेस को नुकसान ना हो और इसका फायदा विरोधी उम्मीदवार को ना मिले।

असहज हो रही है भाजपा
प्रदेश में अब राजगढ़ जिले के ब्यावरा को मिलाकर 28 विधानसभा सीटों में उपचुनाव होंगे। हाल ही में कांग्रेस विधायक के निधन के बाद ब्यावरा में चल रही चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों को लेकर ऐसा माना जा रहा है। इधर भारत निर्वाचन आयोग की तैयारियों और संकेतों के आधार पर कहा जा सकता है कि बिहार के विधानसभा चुनाव के साथ ही मध्य प्रदेश के सभी सीटों में उपचुनाव की तिथि का ऐलान कभी भी किया जा सकता है। इसके बावजूद मैदानी चुनावी तैयारियों में आगे दिख रही भाजपा अभी तक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पाई है। इतना अवश्य है कि भाजपा के शीर्ष नेताओं की ओर से कई बार यह कहा जा चुका है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सभी पूर्व विधायकों को पार्टी अपना उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ाएगी। ऐसी दशा में उनके 28 में से 25 पार्टी टिकट तय माना जा रहा हैं।

इस बीच यह भी संकेत मिलने लगा है कि हार-जीत को लेकर कराए गए मैदानी सर्वे और क्षेत्रीय भाजपा नेताओं की पसंद और नाराजगी को आधार बनाकर पार्टी हाईकमान कुछ पूर्व विधायकों को टिकट देने पर पुनर्विचार भी कर सकती है। स्पष्ट है कि पार्टी को सिर्फ जौरा, आगर और ब्यावरा सीट के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर मशक्कत करनी है। इसके बावजूद प्रत्याशियों की घोषणा नहीं होने से राजनीतिक हलकों में इस बात की जमकर चर्चा होने लगी है कि