ऑक्सफर्ड और येल जैसी यूनिवर्सिटियों के भारत में खुल सकें कैंपस, मोदी सरकार कर रही पहल

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नई दिल्ली
भारत की यूनिवर्सिटियों से माइक्रोसॉफ्ट से लेकर गूगल के सीईओ तक निकले हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी यह चाहते हैं कि येल, ऑक्सफर्ड और स्टेनफोर्ड जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय भी भारत में अपने कैंपस खोलें ताकि उनसे प्रतिस्पर्धा कर भारतीय यूनिवर्सिटी और बेहतर हो सकें। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार दुनिया की जानी-मानी यूनिवर्सिटियों को अपने यहां कैंपस खोलने के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। मॉनसून सत्र के दौरान संसद में एक लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया था कि भारत से करीब साढ़े 7 लाख स्टूडेंट विदेशों में पढ़ाई के लिए जाते हैं और हर साल 15 अरब डॉलर खर्च करते हैं।

विदेशी यूनिवर्सिटियों के कामकाज को नियंत्रित करने से जुड़े कानून के मसौदे को तैयार किया जा रहा है। मसौदा तैयार होने के बाद विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा। यह सत्ताधारी बीजेपी के हृदय परिवर्तन की तरफ इशारा करता है क्योंकि वह अब तक एजुकेशन सेक्टर को खोलने के खिलाफ थी। ऑस्ट्रेलिया सरकार और कुछ यूनिवर्सिटी की तरफ से प्रस्ताव पर रुचि दिखाए जाने का जिक्र करते हुए निशंक ने कहा, 'इसे लेकर बहुत ज्यादा उत्साह है।' भारत को अपने विश्वविद्यालयों को और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एजुकेशन सेक्टर में सुधार की जरूरत है। ग्लोबल टैलेंट कंपटिटिवनेस इंडेक्स 2020 में भारत का 132 देशों में 72वां रैंक है। यह इंडेक्स टैलेंट्स को बढ़ने, आकर्षित करने और बनाए रखने की किसी देश की क्षमताओं को दिखाता है।

हालांकि, भारत की कुख्यात जटिल नौकरशाही विदेशी यूनिवर्सिटियों के लिए मुख्य बाधा है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण में कठिनाई, अकैडमिक स्टाफ और पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां अलग से हैं। निशंक ने यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया कि विदेशी यूनिवर्सिटियों को आकर्षित करने के लिए भारत कौन से कदम उठा रहा है लेकिन उन्होंने यह जरूर बताया कि जो संस्थान नॉट-फॉर-प्रॉफिट आधार पर यहां अपनी शाखाएं खोलना चाहती हैं उन्हें स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी करनी होगी। कुछ विदेशी यूनिवर्सिटियों ने पहले से ही भारतीय संस्थानों के साथ पार्टनरशिप कर ली है। जिससे कि स्टूडेंट भारत में आंशिक पढ़ाई के बाद विदेश स्थित मेन कैंपस से अपनी डिग्री पूरी कर सकते हैं। अब ये विदेशी संस्थान उत्साहित होकर भारत में किसी लोकल पार्टनर के बिना अपने कैंपस खोलना चाहती हैं।