अग्रवाल कंस्ट्रक्शन का सुपर वाइजर बन गया ”वैद्यराज”

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”साजा” के नीचे बैठकर कर रहा घातक बीमारियों का ”प्राकृतिक इलाज”

rafi ahmad ansari
बालाघाट। दगाबाजी और अंधविश्वास से भरे पडे इस संसार में अब कुछ चमत्कार ऐसे भी देखने व सुनने मिलते है जिस पर कतई संशय नही होता। अदृश्य शक्ति और प्राकृतिक औषधी के बलबूते बैतूल की अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कपंनी का सुपरवाइजर रघुनाथ साहू इन दिनो ”वैद्यराज” बनकर कई घातक बिमारीयों का निशुल्क ईलाज कर रहा है। जिसे पीडित लोग आस्था व विश्वास की डोर से बंधा हुआ मान रहे है। हालाकि आयुर्वेद औषधीयों से कई बिमारीयों का प्राकृतिक इलाज संभव है लेंकिन स्थानीय लोगो के साथ साथ जो भी मरीज इनके पास ईलाज कराने आते है वह इसे सिर्फ चमत्कार के रूप में देख रहे है।

जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर चांगोटोला क्षेत्र में इन दिनो आयुर्वेद औषधी व अदृश्य शक्ति से ”वैद्यराज” का बोलबाला चल रहा है। जहां दूर-दराज से कई लोग घातक बिमारी का प्राकृतिक इलाज कराने छिंदवाडा के पातालकोट से आये ”वैद्यराज रघुनाथ साहू” के पास पहुच रहें है। वैद्यराज रघुनाथ साहू ग्राम पंचायत पादरीगंज से 2 किलोमीटर अंदर बैगाटोला आदिवासी बाहुल्य गांव में चौपाल लगाकर अदृश्य शक्ति और प्राकृतिक औषधी के बलबूते लोगो की गंभीर बिमारीयों का निशुल्क ईलाज कर रहे है। जहां पिछले 8 माह से रोजाना ग्राम बैगाटोला में सुबह-शाम जनता दरबार लग रहा है। आखिर यह कैसे गंभीर परेशानियों से लोगों को निजात दिला रहे है, यह जानना आवश्यक है। रोजाना सुबह-शाम बडादेव की पूजा अर्चना करने के बाद ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू साजा के पेड के नीचे बैठकर बिना कुछ बताये ही पीडित की परेशानी को जानकर उन लोगो का ईलाज कर रहे है। यह जानकर सभी लोग अचंम्भित है कि आखिर उन्हे कैसे लोगो की परेशानी व बिमारी की सम्पूर्ण जानकारी पता चल जाती है। यह बात लोगो को हैरान व परेशान कर रही है, लेकिन वैद्यराज इसके पीछे बडादेव की दैविक शक्ति होने का दावा कर रहे है।

छिंदवाडा के पातालकोट से आये ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू अशिक्षित है, लेकिन स्वंय के नाम की हस्ताक्षर करना बखूबी जानते है। उनमें आयुर्वेद औषधियों का ज्ञान कूट कूट कर भरा है, जहां उन्हे साजा के पेड से सिद्धि का मंत्र मिलता और वे जडी-बूटी से ईलाज कर पाते है। ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू ने बताया कि उनके गांव क्षेत्र में अधिकांश लोग औषधी बनाने का ही कार्य करते है। उनके नानाजी शैतानसिंह साहूजिया जंगल के बहुत बडे जानकार माने जाते थे। जहां उन्होने अपने नानाजी से ही जंगल में पाई जाने वाली तमाम औषधियों के बारे में जानकारी व ईलाज हेतू ज्ञान प्राप्त किया है। 52 वर्षिय ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू वास्तविकता में एक साधारण मनुष्य की भांति है, लेकिन पीडित मरीजो के लिये वे अब धीरे धीरे मसीहा बनते जा रहे है। इनके नाम व सिद्धि का गुणगान अब चंहु ओर फैल रहा है। अब तक उन्होने विभिन्न प्रकार की बिमारी से ग्रसीत करीब 300 से अधिक मरीजो का सफल ईलाज किया है।

वैद्यराज के पास संभव है लकवा,बवासीर,कैंसर,पथरी,टीबी जैसी बिमारी प्राकृतिक ईलाज–
आपको बता दें, अग्रवाल कंस्ट्रक्शन मे सुपरवाइजर का काम कर रहे ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू हॉल मुकाम बैतूल जिले के मुलताई के रहने वाले हैं। छिंदवाडा के पातालकोट में उनका अपना परिवार है। दिखने में तो साधारण व्यक्ति लगते है, लेकिन ये अपने आप में प्राकृतिक औषधीयो के बडे जानकार है, तभी तो यें बैगाटोला में पिछले 8 माह से लोगो का आयुर्वेद औषधी व जड़ी बूटी का घोल बनाकर लकवा,बवासीर,कैंसर,पथरी,टीबी जैसी बिमारी का प्राकृतिक ईलाज कर रहे है। अब तक इन्होने कई जिलो को मिलकर 14 हजार से भी अधिक लोगो का सफल ईलाज किया है। जिस कारण इनके ईलाज की किलकारी दूर दूर तक गुंज रही है। घातक बिमारी से ग्रसीत पडे लोग भी इनसे ईलाज कराने के बाद इनका गुणगान करके बिमारी से निजात मिलना एवं शरीर को फायदा होना बता रहे है। इनके साथ कुछ स्थानीय युवा भी जुड चुके है जो इनकी निशानदेही पर कार्य करते हुए औषधीयां और जडी-बूटी तलाश करके लाते है। ”वैद्यराज” रघुनाथ साहू ने बताया कि कुछ जडी-बुटी केवलारी और कान्हा नेशनल पार्क के जंगल में मिलती है, जहां जरूरत पडे पर उनकी युवाओ की टीम को लंबा सफर तय करके केवलारी और कान्हा नेशनल पार्क तक जाना पडता है।

”वैद्यराज” रघुनाथ साहू का कहना है कि ईलाज के लिये उनकी बैठक साजा के पेड की छत्रछाया तक ही सीमित है। यदि वे पेड की छाया के बाहर निकलते है, उन्हे कुछ दिखाई व समझ नही देता। उन्हे, धरती की कोख से जन्में प्राकृतिक साजा के पेड़ से अदृश्य शक्ति मिलती है जिसके नीचे ही बैठक वे गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज जड़ी बूटी के माध्यम से कर पा रहे है। यदि वे यहां से चलकर अन्यत्र जगह ईलाज करना चाहे तो वह उनसे संभव नही हो सकेगा। उन्होने साजा के पेड में बडादेव का वास होना बताया और वे पेड की अदृश्य शक्ति से ही जडी-बूटी के माध्यम से ईलाज करने का दावा कर रहे है।